'स्मार्ट सिटी' कानपुर, शहर भर में 42 'स्मार्ट पार्किंग' स्थानों के साथ अपग्रेड होने के लिए तैयार है। इस अपग्रेड के लिए बार्सिलोना, स्पेन से सेंसर इम्पोर्ट किए गए हैं। यहाँ लगाए जाने वाले उन्नत उपकरण पार्किंग एरिया में वाहनों की संख्या और खाली जगहों की उपलब्धता का पता लगाएंगे। यह लोगों के लिए डिजिटल रूप से सुगम एक सिस्टम बनकर तैयार होगा जिससे वे पार्किंग स्थानों को प्री-बुक करने सक्षम होंगे और बाद में अनुपलब्धता के कारण ट्रैफिक से बच सकेंगे।

पार्किंग के लिए नागरिक कर सकेंगे प्री बुकिंग


'स्मार्ट पार्किंग' पहल को 'स्मार्ट सिटी मिशन' के तहत करीब डेढ़ साल पहले शामिल किया गया था, जब महेंद्र टेक कंपनी ने ₹5 करोड़ के बजट में 42 सेंसर पार्किंग स्थल बनाने का टेंडर जीता था। इनमें से 29 पार्किंग स्थान दोपहिया वाहनों के लिए होंगे जबकि शेष 13 चार पहिया वाहनों के लिए होंगे

परियोजना अपने अंतिम चरण में है और फूल बाग को छोड़कर सभी केंद्रों पर काम पूरा हो चुका है। कथित तौर पर, कानपुर का पहला ऐसा ऑपरेशन दो दिनों के भीतर कारगिल पार्क में शुरू होने वाला है।

कानपुर में दोपहिया स्मार्ट पार्किंग लॉट निम्नलिखित स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे:

नगर मुख्यालय,मधुराज नर्सिंग होम,द्विवेदी अस्पताल,रतनदीप अस्पताल,पालीवाल डायग्नोस्टिक्स एंड मेडिकेयर,भार्गव अस्पताल,केपीएम गैस्ट्रोलिवर अस्पताल,आरएसपीएल लिमिटेड,कृष्णा टावर,सिटी सेंटर कॉम्प्लेक्स,सब्जी मंडी ओ ब्लॉक,अस्थाना टॉवर,आकाश संस्थान,कल्पना प्लाजा,परिनय गेस्ट हाउस,चौधरी मैरिज लॉन ई ब्लॉक,नसीमाबाद प्रखंड,मिक्की हाउस के ब्लॉक,सोसाइटी मोटर्स,सीएमएस दूध मंडी,राजीव वाटिका,कारगिल पार्क एवं लाजपत भवन।

कानपुर में चार पहिया स्मार्ट पार्किंग लॉट निम्नलिखित स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे:

नगर मुख्यालय,कारगिल पार्क,लाजपत भवन,तुलसी उपवन,गुलाब सिंह बीर बड़ी,राजीव वाटिका,सोमदत्त प्लाजा,पद्मा टावर,मर्चेंट चैंबर,सर्वोदय नगर,फूल बाग।


जल्द ही इन सभी जगहों पर पार्किंग की जगह बुक करने के लिए मोबाइल जनरेटेड विकल्प उपलब्ध होगा। प्रत्येक बुकिंग के बाद, इंटीग्रेटेड नियंत्रण और कमांड सेंटर में पार्क किए गए और खाली स्थानों की संख्या को अपडेट किया जाएगा। डिजिटल सिस्टम के बारे में अन्य सभी जानकारी और विवरण 400 स्थानों पर डिस्प्ले बोर्ड के माध्यम से जनता को तक पहुंचाई जायेगी। बताया जा रहा है कि इन जगहों पर लगभग 1.5 फीट की भूमिगत गहराई पर विदेश से आये सेंसर लगाए जाएंगे, ताकि जलभराव से संबंधित काम आसानी से हो सके।