मुख्य बातें

आईआईटी कानपुर में अंतरिक्ष विज्ञान व खगोल विज्ञान और डिजाइन के क्षेत्र में दो नए विभागों के स्थापना की गई।
एकेडमिक सीनेट में पास होने के बाद यह फैसला किया गया।
संस्थान में विभागों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है, 4 साल पहले तक केवल 14 विभाग थे।
संस्थान 2023 की शुरुआत में बैचलर ऑफ डिजाइन कार्यक्रम शुरू करने की भी योजना बना रहा है

देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक, आईआईटी कानपुर में अंतरिक्ष विज्ञान व खगोल विज्ञान और डिजाइन के क्षेत्र में दो नए विभागों के स्थापना की गई है। जिसकी अनुमति 12 जनवरी को हुई बोर्ड ऑफ गवर्नेंस में मिल गई हैं। एकेडमिक सीनेट में पास होने के बाद यह फैसला हुआ। अब संस्थान में कुल 20 विभागों में अलग-अलग पाठ्यक्रम में छात्र-छात्राओं को पढ़ाया जाएगा। चार साल पहले तक संस्थान में सिर्फ 14 विभाग थे।

2023 में बैचलर ऑफ डिजाइन कार्यक्रम किया जाएग शुरू

संस्थान में डिजाइन प्रोग्राम 2002 में शुरू किया गया था, जिसे अब डिजाइन विभाग का रूप दिया गया है। आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो अभय करंदीकर ने बताया कि, संस्थान 2023 की शुरुआत में बैचलर ऑफ डिजाइन कार्यक्रम शुरू करने की भी योजना बना रहा है। नया विभाग अपने लोकप्रिय मास्टर ऑफ डिजाइन कार्यक्रम का भी विस्तार करेगा, जिसने पहले भी प्लेसमेंट के लिए माइक्रोसॉफ्ट, नोकिया, गूगल, ओरेकल, टीसीएस, और इंफोसिस को आकर्षित किया है। इसके अलावा अपने मौजूदा पीएचडी कार्यक्रम को बढ़ाने की योजना बना रहा है, विभाग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित डिजाइन स्कूलों जैसे कि स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, ऑल्टो यूनिवर्सिटी और जॉर्जिया टेक के साथ साझेदारी करने के लिए तैयार है।

डिजाइन विभाग का नेतृत्व डिजाइन कार्यक्रम के वर्तमान प्रमुख प्रोफेसर नचिकेता तिवारी करेंगे। इसमें नए उत्पाद अवधारणा और विकास, उत्पाद डिजाइन, इंजीनियरिंग डिजाइन, ब्रांडिंग, उपयोगकर्ता-अनुभव और पैकेजिंग के क्षेत्रों में उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक डिजाइन सेल भी होगा।

अंतरिक्ष व खगोल विज्ञान देश में अपने तरह का पहले विभाग होगा!

अंतरिक्ष विज्ञान और खगोल विज्ञान विभाग अंतरिक्ष, ग्रह, खगोल विज्ञान और इंजीनियरिंग के व्यापक क्षेत्र के लिए समर्पित होगा। यह इंस्ट्रूमेंटेशन जैसे अंतरिक्ष मिशन और खगोलीय वेधशालाओं, अंतरिक्ष यान डिजाइन और अंतरिक्ष मिशन योजना आदि के लिए अनुसंधान के कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने के लिए इंजीनियर, खगोलविद, खगोल भौतिकीविदों और ग्रह वैज्ञानिकों को एक साथ लाने के लिए भारत में अपनी तरह का पहला विभाग होगा। विभाग कई अनसुलझे सवाल जैसे क्या बाहरी अंतरिक्ष में जीवन है, क्या अन्य ग्रह रहने योग्य हैं, ब्लैक होल के पीछे का विज्ञान, क्षुद्र ग्रहों का खनन किया जा सकता है या नहीं को सुलझाने में मदद करेगा।

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