प्राचीन काल में ‘मैनचेस्टर ऑफ़ द ईस्ट’ (Manchester of the East) के रूप में प्रसिद्ध, कानपुर के चमड़े का काम भारत और दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस शहर के कारीगर एक सदी से भी अधिक समय से ‘हार्नेस’ (Harnesses) और ‘घोड़े की काठी’ (horse saddles) का उत्पादन कर रहे हैं, हालांकि ‘कानपुर सैडलरी’ (Kanpur Saddlery) के लिए हाल ही में 2014 में एक ‘जीआई टैग’ (GI tag) को मंजूरी दी गई थी। चलिए इस टैग के साथ हम आपको कानपूर के चमड़े के इतिहास के बारे में बताते हैं की कैसे कानपुर ने अपने अद्वितीय घुड़सवारी परिधान के साथ दुनिया के नक़्शे पर खुद को स्थापित किया।

सैडलरी हब बनने का रास्ता 

कानपुर में औद्योगिक विकास अंग्रेजों के साथ आया जिन्होंने 1857 में सत्ती चौरा विद्रोह के बाद शहर को एक किले में बदल दिया। ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड की स्थापना 19वीं शताब्दी में तैनात फाॅर्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए की गई थी, जिसमें चमड़े के जूते, घोड़े की काठी, वर्दी के साथ अन्य चीजों का निर्माण शामिल था।

स्थापित कई कारखानों में, सबसे प्रमुख थे गवर्नमेंट हार्नेस एंड सैडलरी फैक्ट्री, जिसने 1860 में माल की सप्लाई शुरू की और कूपर एलन एंड कंपनी, जहां पर 1880 में निर्माण शुरू हुआ। अंग्रेज़ों द्वारा प्रशिक्षित चमड़े के कारीगरों ने अपने कौशल और सीख को युवा पीढ़ियों तक पहुँचाया और उन्ही की ईमानदारी, मेहनत और उदारता का नतीजा था की कानपुर दुनिया में काठी के केंद्रों में से एक के रूप में उभरा।

जबकि वॉल्सॉल (Walsall), इंग्लैंड, दुनिया की सैडलरी राजधानी के रूप में प्रसिद्ध है। बढ़ती उत्पादन लागत ने काम को कानपुर को आउटसोर्स करने के लिए मजबूर कर दिया और सैडल निर्माण में इन विकासों ने इसे शहर में जीआई टैग दिलवाने के लिए विकसित किया। इससे कानपूर में एचबीटीयू में चमड़ा प्रौद्योगिकी विभाग और आईआईटी कानपुर के सह-प्रायोजित, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सैडलरी टेक्नोलॉजी एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट जैसे संबंधित शैक्षिक प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की भी शुरुआत हुई।

नॉक-नॉक 

अमेरिका, ब्रिटेन, बेल्जियम, नीदरलैंड, फ्रांस, स्वीडन, इटली और डेनमार्क सहित कुछ अन्य देशों में काठी के सामान का उत्पादन किया जाता है। चमड़े के काम में अपने योगदान के माध्यम से, कानपुर ने भारत को इन देशों की श्रेणी में रखा और शहर को चमड़े के सर्वश्रेष्ठ केंद्र के रूप में स्थापित किया है। इसलिए यदि आप प्रीमियम क्वालिटी के चमड़े के सामान की तलाश कर रहे हैं या चमड़े की तकनीक में ट्रेनिंग ले रहे हैं, तो महामारी की स्थिति में सुधार होने के बाद इस शहर का दौरा करना ना भूलें!

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