अगली पीढ़ी के रेडियो प्रसारण के दृश्य को बदलने के लिए आईआईटी कानपुर ने प्रसार भारती के साथ एक मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए हैं। इसी के तहत आईआईटी कानपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मीडिया एंड ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजीज की स्थापना की जाएगी। नया केंद्र 5जी के ग्लोबल स्टैण्डर्ड के साथ रेडियो संकेतों को कारगर बनाएगा। इसके साथ यह केंद्र डायरेक्ट-टू-मोबाइल प्रसारण क्षमताओं के रास्ते तलाशेगा।

कन्वर्जेन्स की एक स्वदेशी प्रणाली की आवश्यकता

भारत के लोक सेवा प्रसारक, प्रसार भारती ने डिजिटल वीडियो और ऑडियो के इस्तेमाल की अपार संभावनाओं को महसूस किया है। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए, प्रसारण तकनीक की प्रगति पर ध्यान केंद्रित किया गया है। सिनेमा हॉल और ऐसी अन्य एजेंसियों के बंद होने के कारण, बड़ी संख्या में दर्शक अब स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने लगे हैं। प्रसारण में 5G सेवाओं की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। कानपुर आईआईटी और प्रसार भारती मिलकर नेक्स्ट जनरेशन ब्रॉड कास्टिंग टेक्नोलॉजी पर काम करेंगे। एक ऐसी ब्रॉडकॉस्टिंग तकनीक बनाएंगे जिससे लोग बगैर इंटरनेट के मोबाइल पर टीवी चैनल देख सकेंगे।

डायरेक्टर प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि लोग अब मोबाइल, टैबलेट का उपयोग बहुत करने लगे हैं। फिल्म, सीरियल, न्यूज चैनल को देखने के लिए रोजाना काफी डाटा खर्च होता है। ऐसे में दर्शकों का डाटा खर्च न हो और उनको टीवी चैनल भी दिखते रहे, इसके लिए तकनीक विकसित की जा रही है। प्रसार भारती आर्थिक सहयोग करेगा। प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर वेम्पति ने बताया कि मेक इन इंडिया के तहत यह कार्य किया जाएगा।

एक ऐसा कॉमन ब्रॉडकॉस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा ताकि ऑडियो और वीडियो ब्रॉडकॉस्ट कटेंट सीधे मोबाइल पर जा सकें। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में डायरेक्ट टू मोबाइल ब्रॉडकॉस्टिंग, कन्वर्जेंस विद 5जी, ऑटोमेटिक स्पीच रिकॉग्नाइजेशन फॉर स्पीच सबटाइटल और ऑडियो और टेक्स्ट क्वेरी पर काम किया जाएगा।

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