मुख्य बिंदु:

– कानपुर के जाजमऊ पुल की स्थिति की जांच करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने आईआईटी कानपुर के साथ करार किया।

– इस अध्ययन में पुल की उम्र, भार क्षमता, बार- बार गड्ढे होने के कारण, बेयरिंग आदि की जांच की जाएगी।

– आइआइटी के प्रोफेसर एसआर चौधरी की टीम इस पुल की जांच करेगी और तीन माह में रिपोर्ट देगी।

कानपुर में पुराने जाजमऊ पुल की उम्र, भार क्षमता, बार- बार गड्ढे होने के कारण, बेयरिंग आदि की जांच के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने आईआईटी कानपुर के साथ करार किया। रिपोर्ट के अनुसार, आइआइटी के प्रोफेसर एसआर चौधरी की टीम इस पुल की जांच करेगी और तीन माह में रिपोर्ट देगी।

इस कार्य के लिए आईआईटी कानपुर की टीम को दिए गए 15 लाख रुपये

जाजमऊ पुल पर रोज़ बड़ी संख्या में भारी वाहन गुजरते हैं, इसकी वर्तमान स्थिति का पता लगाने के लिए इसके बेयरिंग, पिलर और ज्वाइंट की जांच की जाएगी। इस कार्य के लिए आइआइटी के प्रोफेसर एसआर चौधरी को 15 लाख रुपये दिए गए हैं। एनएचएआइ के परियोजना निदेशक पंकज मिश्र ने बताया कि तीन महीनों में अध्ययन रिपोर्ट आइआइटी कानपुर द्वारा दी जाएगी, जिसके बाद ही मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा।

जाजमऊ में 1975 में गंगा पर पुल बनाया गया था। यातायात का दबाव अधिक होने के कारण और हर दिन पांच से छह हजार गिट्टी-मौरंग लदे ट्रक गुजरने के कारण इसकी हालत जर्जर हो गई है। यहां पर जाम भी बहुत लगता है। अमूमन सीमेंटेड पुल की मियाद सौ साल तक होती है, लेकिन इसके लिए हर साल पुल की मरम्मत होना जरूरी है। हालांकि इस पुल की पहली बार मरम्मत 2009 में हुई थी,  2018 में भी काम चलाऊ मरम्मत की गई थी।

इसके बाद 2019 एसएच इंफ्राटेक कंपनी द्वारा की गई जांच में इसके कई बेयरिंग टूटे पाए गए। 2020 में भी इसकी मरम्मत की गई, नियमों के अनुसार हर चार साल में एक बार सड़क की मरम्मत की जानी चाहिए, जो कि यहां नहीं किया गया, जिसके कारण इसकी ऐसा हालत हो गई है। अब आईआईटी कानपुर द्वारा की गई जांच से पुल की कमियों का पता चलेगा, जिससे मरम्मत कार्य में सहायता मिलेगी।

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