महामारी के अध्ययन के लिए आईआईटी कानपुर में विकसित गणितीय मॉडल ‘सूत्र’ में आसन्न तीसरी लहर के संबंध में कुछ आशावादी निष्कर्ष निकल कर आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मॉडल में भविष्य के लिए तीन संभावनाओं का अनुमान लगाया गया है, और यह भी बताया गया है कि अगर कोई म्यूटेंट नहीं मिला तो तीसरी लहर पहली दूसरी और लहर के मुकाबले कमज़ोर होगी। इसके अतिरिक्त,अध्ययन का अनुमान है कि अगर एक नया अधिक संक्रामक म्यूटेंट सामने आता है, तो इसके प्रभाव दूसरी लहर के समान हो सकते हैं।

कोई नया म्यूटेंट नहीं मिलने पर अगस्त तक स्थिति सामान्य हो सकती है

अध्ययन के निष्कर्षों को देखते हुए, पहले अनुमान के अनुसार कि लोगों का जीवन अगस्त तक सामान्य स्थिति में वापस आ सकता है यदि कोई नया म्यूटेंट उच्च संक्रमण दर से नहीं फैलता है। अगर ऐसा होता है, तो तीसरी लहर का प्रभाव दूसरी लहर के बराबर हो सकता है। दूसरे के अनुसार अगर पहले पहला अनुमान सही होता है तो, टीकाकरण 20 प्रतिशत कम प्रभावी होगा। इसके अलावा, तीसरी स्थिति निराशाजनक है जिसके मुताबिक अगस्त में एक नया म्यूटेंट सामने आ सकता है जो 25 प्रतिशत ज्यादा संक्रामक होगा। इस मॉडल के अनुसार, अगर कोरोना वायरस का कोई ऐसा म्यूटेंट आ जाए जो बड़े पैमाने पर वैक्सीन को भी चकमा दे सके, या लोगों की इम्युनिटी से बच सके तो ऊपर की तीनों संभावित परिस्थितियों का अनुमान अमान्य हो जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने कहा है कि दो महत्वपूर्ण पहलुओं- रिकवर हुए लोगों में प्रतिरक्षा की हानि और टीकाकरण से मिली इम्युनिटी की प्रभावकारिता को अध्ययन में शामिल किया जाना है।

डेल्टा प्लस स्ट्रेन एक चिंता का विषय है

रिपोर्ट के अनुसार, पहली परिदृश्य में अक्टूबर में तीसरी लहर चरम (पीक) पर होगी, लेकिन दूसरी लहर की तुलना में इसकी ऊंचाई कम होगी। दूसरे परिदृश्य के हिसाब से, इसकी चोटी दूसरी लहर से ज्यादा ऊंची होगी और पहले ही आ सकती है (सितंबर में)। इसके अलावा, सख्त सामाजिक दूरी के पालन से तीसरी लहर का चरम अक्टूबर के आखिर तक टल सकता है। देश में डेल्टा प्लस के उभरते मामलों को देखते हुए, तीसरी लहर के प्रभावों को कम करने के लिए व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है।

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