मुख्य बिंदु 

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंगा नदी के आसपास स्थित सभी शहरों को 50 एकड़ के जैव विविधता पार्कों को विकसित करने का निर्देश दिया है।

कानपुर विकास प्राधिकरण ने अपने बॉटनिकल गार्डन के ड्रीम प्रोजेक्ट को अब जैव विविधता पार्क योजना में बदलने की योजना बनाई है।

इस परियोजना के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय केडीए की सहायता करेगा।

अधिकारी के अनुसार, परियोजना को तीन अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंगा नदी के आसपास स्थित सभी शहरों को 50 एकड़ के जैव विविधता पार्क को विकसित करने का निर्देश दिया है। इसी के अनुरूप कानपुर विकास प्राधिकरण ने अपने बॉटनिकल गार्डन के ड्रीम प्रोजेक्ट को अब जैव विविधता पार्क योजना में बदलने की योजना बनाई है। यह फैसला एक उच्च स्तरीय समिति की बैठक के बाद लिया गया है जो की शहर के विकास कार्यक्रमों पर चर्चा करने के लिए बुलाई गयी थी।

विकास परियोजना में दिल्ली विश्वविद्यालय केडीए की सहायता करेगा

इस परियोजना के लिए केडीए ने दिल्ली विश्वविद्यालय से सहायता मांगी है, जो लंबे समय से जैव विविधता पार्कों के संरक्षण के लिए एक विशेष कार्यक्रम पर काम कर रहा है। अदालतों के निर्देश के तहत काम करते हुए, केंद्रीय विश्वविद्यालय देश के विभिन्न हिस्सों में एनजीटी के लिए विभिन्न परियोजनाओं का संचालन कर रहा है।

दिल्ली विश्वविद्यालय से इस परियोजना के नोडल अधिकारी डॉ फैयाज खुदसर ने अगस्त में कानपुर का 2 दिवसीय आधिकारिक दौरा किया। साइट का दौरा करते हुए, डॉ फैयाज ने जोर देकर कहा कि यह क्षेत्र प्रस्तावित जैव विविधता पार्क के निर्माण के लिए उपयुक्त है। इसके अलावा, उन्होंने आयुक्त, केडीए के उपाध्यक्ष और वन और सिंचाई विभागों के अधिकारियों के साथ व्यापक चर्चा की।

तीन चरणों में शुरू की जायेगी परियोजना

अधिकारी के अनुसार, परियोजना को तीन अलग-अलग चरणों में शुरू करने का प्रस्ताव है। पहले चरण में जलाशयों से गाद निकालने और इलाके में गंगा के प्रवेश बिंदु पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके बाद, गंगा के स्थानीय इकोसिस्टम के आधार पर इस क्षेत्र में एक गहन वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा। तीसरे और अंतिम चरण में, शौचालय, पार्किंग स्थल, गैलरी, पैदल मार्ग और प्रदर्शनी केंद्रों सहित क्षेत्र में सहायक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा।

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