ये औरत तुझे क्या कहुँ, तेरी हर बात निराली है

तू एक ऐसा पौधा है जिस घर रहे वह हरियाली ही हरियाली है

तेरी शान में सिर्फ इतना कह सकते है की

तेरी उचाईयो के सामने आसमान भी नहीं रह सकता है

मेरी सिर्फ इतना सा एक पैगाम है

ऐ औरत तुझे मेरा सिर झुका कर सलाम है

कहते है नारी जहां कदम रखती है वो जगह और भी सुन्दर और पवित्र हो जाती है। किसी समाज को बदलने में एक नारी की सबसे बड़ी भूमिका होती है। कल तक घर की चारदिवारी में रहने वाली नारी आज घर के दहलीज के बाहर भी अपने सपने देख सकने के काबिल हुई है। शिक्षा, नई राह और बदलते दृष्टिकोण की वजह से नारी आज एक शक्ति के रुप में उभर रही है। आज नारी समाज में पुरषों से कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल कर रही है। आज ऐसी ही एक नारी के बारे में हम आपको बताने जा रहें हैं जिन्होंने अपने काम से पूरे कानपुर जिले का रौशन कर दिया है। 

उत्तर प्रदेश के कानपुर में रहने वाली 60 वर्षीय कलावती देवी नें अपने हाथों से 4000 से अधिक शौचालयों का निर्माण करके शहर में स्वच्छता और स्वच्छता में सुधार के लिए जबरदस्त काम किया है। कानपुर को खुले में शौच से मुक्त बनाने में उनके अहम योगदान की सराहना करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित भी किया। 60 वर्षीय कलावती देवी पेशे से राजमिस्त्री हैं। कलावती देवी खुले में शौच से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए घर-घर जाती हैं। कलावती परिवार में इकलौती कमाने वाली सदस्य हैं, पति और दामाद की मृत्यु के बावजूद उनका हौसला नहीं टूटा और कानपुर जिले में खुले मलोत्सर्ग (Excretion) को खत्म करने की मुहिम जारी रखी। 

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में जन्मीं कलावती देवी कम पढ़ी लिखी है, लेकिन उन्होंने अपने कार्य से और समाज में बदलाव के जज्बे को कायम रखा। कलावती देवी नें ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के लिये अनूठा उदाहरण पेश किया है जो सामाजिक ताने बाने में उलझकर अपना अभीष्ट लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाती हैं। कलावती देवी की शादी महज 13 साल की उम्र में हो गई थी, और वो अपने पति के साथ कानपुर में राजा का पुरवा में आकर रहने लगीं। राजा का पुरवा गंदगी के ढेर पर बसा था और करीब 700 की आबादी वाले इस पूरे मौहल्ले में एक भी शौचालय नहीं था, मौहल्ले के सभी लोग खुले में शौच के लिए जाते थे जिससे उस इलाके में गंदगी का अम्बार लगा हुआ था और कई बीमारियों का खतरा भी लोगों के ऊपर मंडरा रहा था। कलावती देवी ने गंदगी का अंबार देख एनजीओ के साथ जुड़कर राजा का पुरवा में शौचालय निर्माण का बीड़ा उठाया और खुद शौचालय का निर्माण शुरू करवाया। कानपुर को खुले में शौच से मुक्त बनाने में कलावती ने अहम योगदान दिया है।

कलावती देवी ने बताया की शुरू में उन्हें इस कार्य को करने में बड़ी परेशानियों का सामना पड़ा, लोग इस काम के लिए ताना मारते थे, मौहल्ले के लोग जमीन खाली करने के लिए राजी नहीं होते थे। लेकिन धीरे धीरे जब उन्होंने शौचालय और स्वच्छता का महत्व लोगो को बताया समझया तब यह काम शुरू हो सका। इस कार्य में समय लगा लेकिन अपने संकल्प और निष्ठा के साथ उन्होंने इस काम में सफलता हासिल की। स्वच्छता का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता जरूरी है !

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