महामारी के बाद हालात पहले जैसे सामान्य नहीं रहे हैं, लोगों को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिन उपायों को अपनाने की आवश्यकता है, उनमें भी काफी बदलाव आया है। मनुष्यों को स्वच्छ हवा में सांस लेने में मदद करने वाले नियमित एयर प्यूरीफायर अब हमें घातक रोगाणुओं से बचाने में सक्षम नहीं हैं, जो कि हवा को दूषित कर रहे हैं।

इसलिए सांस लेने के लिए, हमें स्वच्छ और घातक रोगाणुओं से रहित हवा उपलब्ध कराने के प्रयास में, AIRTH- ने IIT कानपुर और IIT बॉम्बे के साथ मिलकर एक एंटी-माइक्रोबियल एयर प्यूरीफायर बनाया है। कंपनी का दावा है कि यह एयर प्यूरीफायर रीयल-टाइम में सूक्ष्म जीवों को निष्क्रिय कर सकता है, इसमें वह रोगाणु भी शामिल हैं, जो कोरोना वायरस के आकार के हैं।

हवा में बैक्टीरिया, फंगस और वायरस को निष्क्रिय करने में है सक्षम

IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसा एयर प्यूरीफायर बनाया है जो हवा में मौजूद अन्य वायरस के साथ-साथ काले फंगस को भी मार सकता है। इस एंटी-माइक्रोबियल एयर प्यूरीफायर को AIRTH ने IIT कानपुर के विशेषज्ञों की देखरेख में और IIT बॉम्बे के सहयोग से तैयार किया है।

दावा किया गया है कि यह एयर प्यूरीफायर 600 वर्ग गज के क्षेत्र में हवा को दूषित करने वाले रोगाणुओं को फिल्टर और निष्क्रिय कर सकता है। यह आविष्कार विशेष रूप से उन अस्पतालों को सैनिटाइज करने में उपयोगी होगा जहां वर्तमान में यूवी किरणों और रासायनिक स्प्रे का उपयोग किया जा रहा है। पारंपरिक तरीकों के विपरीत, इस वायु प्यूरीफायर का उपयोग तब भी किया जा सकता है जब अस्पताल परिसर रोगियों से भरा हो क्योंकि यह लोगों के लिए घातक नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि काला फंगस मुंह और नाक के जरिए मानव शरीर के अंदर पहुंच सकता है और हाल ही में इस फंगल इंफेक्शन से हुई मौतों को देखते हुए यह उपकरण वर्तमान समय में उपयोगी साबित हो सकता है। यह सामान्य एयर प्यूरीफायर से अलग है जो केवल एक फिल्टर पर रोगाणुओं को पकड़ता (कैप्चर करता) है, जहां से ये रोगाणु कभी भी बच कर बाहर निकल सकते हैं।

जानते हैं यह प्यूरीफायर काम कैसे करता है 

एंटी-माइक्रोबियल एयर प्यूरीफायर तीन चरणों में काम करता है- पहला, यह प्यूरिफायर में प्रवेश करते ही रोगाणुओं को निष्क्रिय (डिएक्टिवेट) कर देता है। फिर, इन रोगाणुओं को एक विशेष फिल्टर में कैद कर लिया जाता है और अंत में, रोगाणुओं को दूसरी बार निष्क्रिय (डिएक्टिवेट) कर दिया जाता है। यह तीन-चरणीय प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि एक जीवित वायरस बच न जाए और हवा को फिर से दूषित न करे।

AiRTH का दावा है कि इस एयर प्यूरीफायर का दो अलग-अलग लैब में परीक्षण किया गया है, और दोनों जगहों के परीक्षण के परिणामों से यह साबित हुआ है कि यह कोरोना वायरस के आकार के बराबर कणों को भी निष्क्रिय कर सकता है। इन सकारात्मक परीक्षण परिणामों के साथ, कंपनी आगे आश्वासन देती है कि यह एंटी-माइक्रोबियल एयर प्यूरीफायर हमारे आसपास की हवा को 99% स्वच्छ रख सकता है।

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