कोरोना मरीजों को बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए और आगे भी इस वायरस से लड़ने की तैयारी में अब राज्य के 75 जिलों मे अपेक्षित कोरोना मामलों का अनुमान लगाने में सहायता करेगा IIT कानपुर। आने वाले दिनों में देखे जा सकने वाले संक्रमणों की गिनती के एक केंद्रित मूल्यांकन के माध्यम से, राज्य प्रशासन का उद्देश्य रोगियों के इलाज और आम जनमानस को वायरस की चपेट से बचाने के लिए चल रहे उपायों और संसाधनों को और मज़बूत करने का लक्ष्य है। यह उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों विशेष रूप से लखनऊ, जो सबसे ज्यादा प्रभावित शहर है वहां एक संक्रमण पर प्रभावशाली पकड़ बनाने में सहायता करेगा।

मेडिकल इमरजेंसी से बचने में सहायता करेंगे इस विश्लेषण के अनुमान


वर्तमान कोरोना संकट के बारे में बात करते के लिए हाल ही में एक समीक्षा बैठक की गयी जहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा "कोविड पीक को देखते हुए, पूरे देश के विशेषज्ञ अलग अलग विश्लेषण के साथ आ रहे हैं, हमें यूपी में हर जिले के विश्लेषण के लिए IIT-K के साथ समन्वय करना चाहिए।

गणितीय मॉडल की सहायता के साथ, देश के विभिन्न विशेषज्ञों ने महामारी के भविष्य के बारे में अनुमान लगाने के अपने प्रयासों को बदल दिया है। आईआईटी-कानपुर के प्रोफेसर मार्च 2020 में महामारी की शुरुआत के बाद से इस विश्लेषण में शामिल हैं। अब, यह राज्य सरकार को अपने निष्कर्षों के आधार पर लक्षित कदम शुरू करने में मदद करेगा।

IIT-K के डायरेक्टर प्रोफेसर अभय करंदीकर ने कहा कि संस्थान के प्रोफेसर महिंद्र अग्रवाल देश के अन्य विशेषज्ञों के साथ राष्ट्रीय सुपर मॉडल में शामिल थे। यह अनुमान लगाया जाता है कि वर्तमान परिस्थितियों की ज़िलेवार जांच भविष्य के लिए भरोसेमंद आंकड़ों को निर्धारित करने में मदद कर सकती है। हालांकि यह अध्ययन मेडिकल इमरजेंसी के लिए तैयार होने में सहायता कर सकता है, लेकिन राज्य के अधिकारियों को हस्तक्षेप की योजना बनाते समय अपनी व्यापक दृष्टि में सबसे खराब स्थिति का अनुमान बनाये रखने की आवश्यकता है।