कानपुर के राहुल स्वीट्स द्वारा बनाई गई ये पनीर की जलेबियाँ साधारण जलेबियों का एक सुखद विकल्प हैं। रंग और कुरकुरापन बनाये रखने के लिए धीमी आंच पर पकाई जाने वाले इन जलेबियों के लिए शहर और आस पास के शौक़ीन लोगों में अलग ही दिलचस्पी और प्रशंसा देखने को मिलती है। तो अगर आपको अपनी जीभ को एक मीठा तोहफा देना है तो हम आपके लिए पूरी जानकारी लेकर आये हैं।

कैलोरीज कम, प्रशंसक ज़्यादा !



कानपुर के युवाओं में बढ़ते हुए फिटनेस के महत्त्व को देखते हुए पूरा बाज़ार साधारण व्यंजनों के पौष्टिक विकल्पों से फल फूल रहा है। मिठाई के पारखी (sampler) और शौक़ीन लोग निरंतर ऐसे स्वादिष्ट पदार्थों की तलाश में रहते हैं जो लालसाओं को शांत करने के साथ कैलोरीज को कम से कम बढ़ावा दें। इसीलिए पनीर जलेबियों ने कैलोरीज़ को लेकर सतर्क रहने वाले मीठे के शौक़ीन लोगों की थाली में अपनी जगह बना ली है। मसले हुए पनीर और दूध से बनी हुई ये जलेबियाँ मैदे वाली जलेबियों का एक पौष्टिक विकल्प हैं। सामग्री के साथ इन दोनों तरह की जलेबियों को बनाने की विधि भी काफी अलग है।

इन अत्यंत मधुर पनीर जलेबियों को बनाने की विधि के बारे में बताते हुए राहुल स्वीट्स के मालिक अंकित गुप्ता जी कहते हैं कि 'पनीर जलेबी को देसी घी में धीमी आंच पर तला जाता है, क्यूंकि तेज़ आंच पर पकाने से जलेबी का रंग काला पड़ जाता है, और कुरकुरापन भी बरकरार नहीं रहता। 'उन्होंने ये भी बताया की साधारण जलेबियों से भिन्न इन जलेबियों को 48-78 घंटों के भीतर रखकर भी खाया जा सकता है, और जलेबियों का अपना स्वाद और कुरपुरापन बना रहेगा।

अब जब भी आपकी जीभ मिठास के लिए ललचाये, तब आप कानपुर की ये बेहतरीन पनीर जलेबी ज़रूर चखने जाईये। शाम के समय ताज़ी उपलब्ध इन जलेबियों को ज़रूर अपनी टू-ईट (To Eat) चीज़ों में रखिये, क्यूंकि कानपुर के पास आपकी जीभ को लुभाने के लिए कनपुरिया भाषा के अलावा बहुत कुछ है।

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