देश में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत देश छह हवाई अड्डों के संचालन का ठेका अडानी समूह को मिल गया है। समूह को यह ठेका 50 साल तक के लिए मिला है। इसमें जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी शामिल है और निजी हाथों में दिए जाने पर केंद्र सरकार की मुहर लग चुकी है। सरकार ने पिछले साल नवंबर में एएआई द्वारा परिचालित किए जाने वाले छह हवाई अड्डों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत चलाने की अनुमति दी थी इसी के चलते जयपुर एयरपोर्ट का संचालन और प्रबंधन अडानी एंटरप्राइजेज को सौंपा जा चुका है।

18 जुलाई से अडानी समूह करेगा संचालन


नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अडानी एंटरप्राइजेज के साथ एक समझौता ज्ञापन ( एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के आधार पर, अडानी समूह 18 जुलाई को हवाई अड्डे पर परिचालन को संभालेगा, जिसे तकनीकी शब्दावली में 'वाणिज्यिक संचालन तिथि' (सीओडी) (Commercial Operation Date (COD) कहा जाता है। गौरतलब है कि देश भर के 6 हवाई अड्डों के निजीकरण को फरवरी 2019 में अंतिम रूप दिया गया था। इनमें से लखनऊ और अहमदाबाद हवाई अड्डों को पहले ही अडानी समूह को सौंप दिया गया है।

अडानी समूह के कर्मचारी एयरपोर्ट का करेंगे संचालन और रखरखाव


अडानी समूह द्वारा हवाई अड्डे की प्रबंधकीय जिम्मेदारियों को संभालने से पहले कंपनी के अधिकारियों की एक टीम को हवाई अड्डे पर दिन-प्रतिदिन के कामकाज और व्यवस्थाओं का ऑब्जर्वेशन करना है। सीओडी से दो महीने पहले निजी कंपनी संबंधित एयरपोर्ट पर कंट्रोल रूम बनाती है। जहां से कंपनी एयरपोर्ट पर कॉमर्शियल और ऑपरेशनल प्वाइंट को ऑब्जर्व करती है। जयपुर एयरपोर्ट की सीओडी 18 जुलाई है।

लेकिन अभी तक अडानी समूह की ऑब्जर्वेशन टीम यहां नहीं पहुंची है जिससे यह यह माना जा रहा है कि कोरोना के चलते सीओडी को आगे बढ़ाया जा सकता है। आपको बता दें की शुरूआत में यात्रियों को इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन बाद में अडानी कंपनी पार्किंग, लाउंज, फूड यूनिट और एयरलाइंस के प्लेसमेंट स्लॉट की फीस में बढ़ोतरी करेगी, जिससे यात्रियों की जेब पर इसका भार बढ़ेगा।