अगर आप भी उन लोगों में से हैं जिनका मन कभी भी जयपुर और यहां की खूबसूरती से नहीं भरता, तो आपको सरगासूली टॉवर से शहर की आभा को अपनी आंखो से ज़रुर देखना चाहिए। 1749 ईसवी में निर्मित, सरगासुली टॉवर (जिसे 'ईसार लाट' के नाम से भी जाना जाता है) पूरे शहर का सबसे बेहतरीन दृश्य प्रदान करता है।


जयपुर में ऐसी स्मारकों की भरमार है जो हमें इसके ऐतिहासिक मूल्य के बारे में बताती है, यह टॉवर भी एक ऐसी ही इमारत है। सरगासूली टॉवर, राजा माधव सिंह पर राजा ईश्वरी सिंह की जीत की एक दिलचस्प कहानी बयां करता है, जिसने बाद में इस संरचना को जन्म दिया। राजा ईश्वरी सिंह की सेना ने मेवाड़ और मराठों की संयुक्त सेनाओं को हराया था, जो माधोसिंह की तरफ से लड़ रही थी, इस जीत को यादगार बनाने के लिए सरगासूली टॉवर का निर्माण किया गया था।

जयपुर की सबसे ऊंची ऐतिहासिक इमारत


इतिहास में दुनिया भर में विभिन्न जगहों पर यह देखा गया है कि किसी भी बड़ी या प्रतीकात्मक घटना को चिह्नित करने के लिए टॉवर बनवाए जाते थे। सरगासुली टॉवर, जयपुर की सबसे ऊंची ऐतिहासिक इमारत है, जो दिल्ली के कुतुब मीनार और चित्तौड़गढ़ के कीर्ति स्तम्भ से प्रेरित है। जयपुर जंक्शन से 5 किमी दूर स्थित, यह सिटी पैलेस के त्रिपोलिया गेट के पास स्थित है। यह 8-मंज़िला मीनार पूरे शहर का एक लुभावना दृश्य प्रदान करती है जिसके कारण पहले इसका इस्तेमाल एक वाच टावर के रूप में होता था।

नॉक नॉक

वैसे तो राजा ईश्वरी सिंह के नाम पर इसे इसार लाट नाम दिया गया था, लेकिन स्थानीय लोगों द्वारा इसे सरगासूली कहा जाता है, क्योंकि इसकी लंबाई को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह सीधे आकाश में छेद करते हुए स्वर्ग की ओर जा रहा है। कई सालों तक, सरगासूली टॉवर में प्रवेश वर्जित था लेकिन अब यह पर्यटकों के लिए खुल चुका है। 70 रूपये प्रति व्यक्ति के प्रवेश शुल्क के साथ, आप यहां सुबह 9:30 से शाम 4 बजे तक के बीच में कभी भी जा सकते है।