कभी कभी छोटी उम्र में हमें कोई वस्तु इतना अधिक आकर्षित करती है की वह जीवन भर के लिए हमारे दिल और दिमाग पर अंकित हो जाती है। ऐसा ही हुआ जोधपुर के निवासी सुभाष सिंगारिया के साथ जिनको 9वीं कक्षा में एक अंग्रेजी पर्यटक द्वारा दिए सिक्के से इतना प्रेम हो गया है की वे 1999 से देश दुनिया के सिक्कों को एकत्रित कर रहे हैं, उनका प्रदर्शन कर रहे हैं और इस अमूल्य धरोहर का संरक्षण कर रहे हैं जो की बीते समय का लेन देन और व्यापार के इतिहास को समेटे हुए है।

जूनून से निकली एक अद्भुत दास्तान

अमूमन ऐसा होता है कि किसी महल या सांस्कृतिक धरोहरों में किसी म्यूजियम की नींव रखी जाती है। लेकिन राजस्थान के जोधपुर शहर के भदवासिया क्षेत्र की संकरी गली में स्थित सुभाष सिंगारिया का घर सिंगारिया सिक्का संग्रहालय में बदल गया जो मुद्राओं का एक अनूठा संग्रहालय है। यह न्यूमिज़माटिक्स या फिर मुद्राशास्त्र के ज़रिये देश दुनिया के इतिहास को संजोने और मानव सभ्यता को समझने के उद्देश्य से बनाया गया था।

देश विदेश के अनेक सिक्कों से लेकर मुद्राशास्त्र तक 

संग्रहालय भारत और कई अन्य देशों के विभिन्न व्यापारिक तरीकों और अर्थशास्त्र के लगभग 10,000 सिक्कों का संग्रह रखने का दावा करता है। यह संग्रहालय प्रमुख रूप से भारत की मुद्रा (सिक्के और कागज दोनों) और प्राचीन भारत से लेकर मुगलों, ब्रिटिशों और डच और फ्रेंच के उपनिवेशों के विभिन्न शासन काल तक समय के साथ इसके विकास को प्रदर्शित करता है। संग्रहालय दुनिया भर से अलग-अलग सिक्के प्रदर्शित करता है, कुछ गलत मुद्रित सिक्के और कागजी मुद्रा भी प्रदर्शित करता है। संग्रहालय में इतिहास और मुद्रा, अर्थशास्त्र और मुद्राशास्त्रीय अध्ययनों के अस्तित्व के बारे में एक छोटा पुस्तकालय भी है।

संग्रहालय का प्रबंधन और देखभाल श्री सुभाष और उनके परिवार द्वारा की जाती है, जिसमें किसी ट्रस्ट, फाउंडेशन या व्यक्ति का कोई अन्य समर्थन नहीं है। श्री सुभाष और उनका परिवार एक सार्वजनिक और एक निजी स्थान के बीच एक अच्छा संतुलन साझा करते हैं क्योंकि संग्रहालय उनका घर है और उनका घर संग्रहालय है, जो किसी भी आगंतुक के लिए एक बहुत ही दुर्लभ और सुंदर अनुभव है।

यह भारत में अपनी तरह का पहला संग्रहालय है। सुभाष सिंगारिया इस संग्रहालय की देखभाल के इलावा स्कूलों में और अन्य कार्यक्रमों में बच्चों और बड़ों को सिक्कों के दिलचस्प इतिहास के बारे में बताते भी हैं। वे मुद्राशास्त्र के ज़रिये लोगों को बीते समय में किस प्रकार से मौद्रिक लेन देन हुआ करता था और किस प्रकार मुद्राओं ने मानव विकास में योगदान दिया है। तो यदि आपके भीतर भी सिक्कों के ज़रिये देश दुनिया के इतिहास में वापस जाने की चाह है तो सिंगारिया मुद्रा संग्रहालय आएं और देखें की किस प्रकार एक व्यक्ति ने पढ़ाई के साथ दुकानों में काम किया,जूस बेचा, जगह जगह जाकर दिन रात एक किये लेकिन युवा मन के अपने कोमल सपने को मरने नहीं दिया।

-साहापडिया से इनपुट के साथ  

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