सूचना और प्रौद्योगिकी के इस युग में भी, भारत के ग्रामीण हिस्सों से संबंधित कुछ लोग अभी भी जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। महिलाओं के लिए शिक्षा को सुलभ बनाने के प्रयास में, जयपुर के बस्सी की एक लड़की ने अपने ही गांव में एक पुस्तकालय खोला। यह महसूस करने के बाद कि उसके गाँव की लड़कियों को लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पुस्तकालय की यात्रा करने की अनुमति नहीं है, कविता सैनी ने पुस्तकालय को लड़कियों तक लाने निर्णय किया।

लड़कियों के लिए फ्री लाइब्रेरी

इस पुस्तकालय को शुरू करने के पीछे के कारण के बारे में बात करते हुए, बस्सी गांव की अनमोल महिला ने कहा, “हमारे गांव में महिलाओं के पास पुस्तकालय की सुविधा नहीं थी और निकटतम पुस्तकालय 13 से 14 किमी दूर था। ऐसे में उन्हें पढ़ाई के लिए बहुत दूर यात्रा करनी पड़ती थी। परिवारों ने छेड़छाड़ के डर से लड़कियों को यात्रा करने से मना कर दिया। इसलिए, मैंने इस पुस्तकालय को गाँव में ही खोल दिया।” इस अनूठी और विचारशील पहल के साथ, कविता, जो वर्तमान में स्नातक की पढ़ाई कर रही है, देश में शिक्षा के लिए एक पोस्टर गर्ल बन गई है।

जयपुर से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित महिलाओं के लिए एक कमरे वाले इस पुस्तकालय में विभिन्न विषयों पर 398 पुस्तकों का संग्रह है। कविता के मुताबिक, लाइब्रेरी रोजाना सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुली रहती है और यहां की सभी लड़कियों के लिए किताबें मुफ्त हैं।

फाइनेंशियल स्वतंत्रता हासिल करने के लिए महिलाओं ने उठाया कदम

इस बीच, बस्सी गांव की महिलाओं ने आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने के लिए विभिन्न कार्य किए हैं। जहां कुछ कुशल महिलाएं कढ़ाई का काम करती हैं, वहीं अन्य हाथ से बने खिलौने बनाती हैं जिन्हें बाद में बाजार में बेचा जाता है। इस तरह की स्थिति में जहां बहुत से लोग कोरोना के कारण अपनी नियमित नौकरी खोकर अपने गाँव लौट आए हैं, हस्तशिल्प ने ग्रामीणों के लिए एक जीवनरक्षक के रूप में काम किया है।

इस कार्यक्रम में शामिल एक अधिकारी के अनुसार, इस कौशल आधारित हस्तशिल्प कार्य की मदद से कई लोगों ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया है। साथ ही, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत इस गांव में महिलाओं को अंग्रेजी भाषा भी सिखाई जा रही है ताकि रोजगार के बेहतर अवसर सुनिश्चित हो सकें।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *