जरुरी बातें

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 1 दिसंबर से अंबर और नाहरगढ़ किलों में सभी व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने का दिया आदेश।
दो किलों में रेस्त्रां के संचालन और अंबर तलहटी के केसर क्यारी में होने वाले लाइट एंड साउंड शो को भी अगले आदेश तक रोका गया।
आदेशों के खिलाफ सरकार कर रही है सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी।
पर्यावरणविद् राजेंद्र तिवारी ने व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने के लिए जनहित याचिका (PIL) दायर की थी।
नाहरगढ़ किले में ‘पड़ाओ’ और ‘वंस अपॉन ए टाइम’ जैसे रेस्तरां सरकारी नियमों के तहत चल रहे हैं।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने जयपुर के अंबर और नाहरगढ़ किलों में सभी व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने का आदेश जारी किया है। एनजीटी द्वारा 4 अक्टूबर को दिए गए आदेश के अनुसार 1 दिसंबर से आरक्षित वन भूमि पर स्थित दो किलों में रेस्त्रां के संचालन के अलावा अंबर तलहटी के केसर क्यारी में होने वाले लाइट एंड साउंड शो को भी अगले आदेश तक रोक दिया गया है।

एनजीटी द्वारा दिए गए इन आदेशों के खिलाफ सरकार अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश के खिलाफ राज्य पुरातत्व विभाग, संग्रहालय और अन्य विभाग द्वारा जस्टिस यू यू ललित, जस्टिस एस आर भट और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी के समक्ष अर्जेंट सुनवाई के लिए याचिका दायर की है।

जनहित याचिका की सुनवाई के बाद दिया था आदेश

पर्यावरणविद् राजेंद्र तिवारी ने आरक्षित वन क्षेत्र और किलों के अंदर व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने के लिए जनहित याचिका (PIL) दायर की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का उल्लंघन है। याचिका की सुनवाई के बाद NGT ने कहा था कि वन क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां वन्यजीव अधिनियम के उद्देश्यों के अनुकूल नहीं हैं। नाहरगढ़ किले में ‘पड़ाओ’ और ‘वंस अपॉन ए टाइम’ जैसे रेस्तरां सरकारी नियमों और राजस्थान ट्रांसपेरेंसी पब्लिक प्रोक्योरमेंट एक्ट 1982 के तहत चल रहे हैं।

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