रणकपुर पश्चिमी भारत में राजस्थान के पाली जिले में अरावली पर्वत श्रृंखलाओं की हरी-भरी घाटी में स्थित एक गाँव है। यहाँ भारत का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण जैन मंदिरों में से एक मौजूद है, जो लगभग 48000 वर्ग फुट क्षेत्र को कवर करता है, और इसमें 29 हॉल, 80 गुंबद हैं और 1444 संगमरमर के स्तंभों के साथ जिसमें प्रत्येक जटिल और कलात्मक रूप से नक्काशीदार है, फिर भी उनमें से कोई भी दो समान नहीं हैं। रणकपुर जैन मंदिर भगवान् आदिनाथ को समर्पित एक चौमुखा मंदिर है याने की चार चेहरों के साथ। मंदिर की ज्यामितीय प्रगति और चौगुनी छवियां तीर्थंकर की चार मौलिक दिशाओं की विजय को दर्शाती हैं।

इस भव्य एवं शालीन मंदिर का निर्माण


रणकपुर जैन मंदिर का निर्माण धर्म शाह नामक एक धनी जैन व्यापारी ने करवाया था। स्थानीय कहानियों के अनुसार धर्म शाह ने जैन धर्म के संस्थापक आदिनाथ के सम्मान में एक मंदिर बनाने का दृढ़ संकल्प लिया। उसने 15 वीं शताब्दी के उदार और प्रतिभाशाली राजपूत सम्राट राणा कुंभा से मंदिर के निर्माण के लिए मदद मांगी और सम्राट ने धर्म शाह को न केवल मंदिर बनाने के लिए भूमि का एक भूखंड दिया, बल्कि उसे स्थान के पास एक बस्ती बनाने की सलाह भी दी। फिर मंदिर और बस्ती का निर्माण एक साथ शुरू हुआ और राजा राणा कुंभा के नाम पर इस शहर का नाम रणकपुर रखा गया।


कहा जाता है कि मंदिर की लागत 10 मिलियन रुपये थी और इसे बनाने में पचास साल से अधिक का समय लगा था। पूरी इमारत नाजुक नक्काशी और जियोमेट्रिक पैटर्न से ढकी हुई है। गुंबदों को संकेंद्रित बैंडों में उकेरा गया है और गुंबद के आधार को शीर्ष से जोड़ने वाले कोष्ठक देवताओं की आकृतियों से ढके हुए हैं। इस मंदिर की सबसे उत्कृष्ट विशेषता इसके अनंत स्तंभ हैं। मंदिर के किसी भी कोने से भगवान की छवि को आसानी से देखा जा सकता है। इन असंख्य स्तंभों ने लोकप्रिय धारणा को जन्म दिया है कि मंदिर में लगभग 1444 स्तंभ हैं।

समय की आपाधापी और मंदिर का गौरव


लेकिन समय की आपाधापी सबसे खूबसूरत कलाकृतियों को भी एक कठिन दौर से गुजरने पर मजबूर कर देती है। 2 शताब्दियों तक भक्ति का प्रतीक रहने के बाद मंदिर संघर्ष शुरू हुआ । 17वीं शताब्दी के आसपास, पूरा क्षेत्र युद्ध से तबाह हो गया था। यह केवल 20वीं शताब्दी की पहली तिमाही के आसपास था जब लोगों को इस बात का एहसास हुआ कि वे सुंदरता और भक्ति की इस संरचना की भव्यता को बिखरता हुआ देखकर कितना बड़ा अपराध कर रहे हैं, और फिर मंदिर को बहाल करने के प्रयास शुरू किये गए और मंदिर को उसका पुराना गौरव लौटाया गया।


रणकपुर मंदिर की नक्काशी का विवरण आपको मंत्रमुग्ध कर देगा। इस परिसर के हर इंच पर बारीक नक्काशी की गई है और आप लगभग उस गहरे प्रेम और विश्वास को महसूस कर सकते हैं जो इस स्थापत्य रत्न को बनाने में लगा है। स्तंभों के माध्यम से छन्ने वाली सूर्य की किरणें अंदरूनी भाग को लगभग एक ऐसा रूप प्रदान करती हैं की आप अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर पाएंगे और यहाँ होने वाले सूरज की रौशनी का खेल भी स्तंभों का रंग बदलता है।