यदि आप कला के इतिहास से रोमांचित है तो फिर आपको जयपुर के इस अपारम्परिक संग्रहालय (non-traditonal museum) में जरूर जाना चाहिए। जयपुर में स्थित 'म्यूजियम ऑफ़ लिगेसी' में न केवल प्राचीन वस्तुओं प्रदर्शित की जाती हैं, बल्कि विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से अपने शिल्प उद्योग में चार चाँद लगाए जाते हैं। यह संग्रहालय भारतीय कलाओं का सूक्ष्म भण्डार है और राजस्थानी कलाओं का परिरक्षक है।

स्थानीय कलात्मक उद्योग और पर्यटन का स्थल



पिंक सिटी के केंद्र में स्थित, म्यूजियम ऑफ़ लिगेसी की स्थापना जिस इमारत में की गयी है वह 1857 से कला का एक स्कूल था। 200 साल पुरानी इस इमारत का निर्माण 1823 राम सिंह II के दरबार में मंत्री पंडित शिवदेवन के निवास के रूप में किया गया था। बाद में, इसे 2017 में स्मार्ट सिटी बैनर के तहत पुनर्निर्मित किया गया था, जब सरकार ने इस इमारत को एक संग्रहालय में बदलने का फैसला किया था।

यह परिसर एक पारंपरिक संग्रहालय की परिभाषा में फिट नहीं होता है, क्योंकि यह कला के प्रति उत्साही लोगों के लिए कार्यशाला और प्रदर्शनियों के लिए एक रचनात्मक स्थान भी है। इस तीन-मंज़िला संरचना में कई गैलरीज हैं जहाँ चित्रों, वस्त्रों, आभूषणों, स्टोनवेयर और तस्वीरों के विशाल संग्रह प्रदर्शित किये जाते हैं। इन सभी कलाकृतियों के बीच सबसे बड़ा आकर्षण संरचना यह स्वयं है।

राजस्थान के सबसे खूबसूरत रचनात्मक नमूनों का घर



यहाँ की कुछ महत्वपूर्ण प्रदर्शित कलाकृतियों में हैं मास्टर डालचंद जटर का मार्बल जाली वर्क, सुधीर कासलीवाल के प्राचीन चांदी आभूषण और साथ साथ महिलाओं और पुरषों की आभूषण धारण किये हुए तस्वीरें और ब्रिज भसीन गैलरी ऑफ़ टेक्सटाइल्स, जहाँ टेक्सटाइल्स और राजस्थान के सभी जिलों के पारम्परिक वस्त्र देखने को मिलते हैं।

यदि आपको ऐतिहासिक काल्पनीय कथाएं मनोरंजक लगती हैं और आपको राजपूती राजघरानों के युग के बारे में जानना है, तो अपनी कल्पना में रंग भरने के लिए जयपुर के म्यूजियम ऑफ़ लिगेसी जरूर जाएँ, और हाँ, अपना कैमरा ले जाने न भूलें।

दिन - मंगलवार से रविवार

समय - दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक

स्थान - किशनपोल बाजार रोड, मोदीखाना