हम आज राजस्थान की सुखपाली पंवार की कहानी आप तक लेकर आये हैं, जिन्होंने पूरे भारत की महिलाओं के लिए एक उदाहरण स्थापित किया है। सुखपाली ने यह साबित कर दिया की महिलाएं अपने विकास को प्रतिबंधित करने वाली सभी सीमाओं को तोड़कर अपने इरादों को सच कर सकती हैं। पक्षी- ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की सुरक्षा के लिए पहली महिला वन रक्षक के रूप में जानी जाने वाली, सुखपाली पंवार की यात्रा कई घटनाओं से जुड़ी हुई है जो वीलडलाइफ़ के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती हैं। यह लेख सुखपाली पंवार की पहल पर प्रकाश डालता है जब वह राजस्थान के डेजर्ट नेशनल पार्क में तैनात थीं।

एक माँ और रक्षक के रूप में समर्पित प्रयास



सुखपाली 2013 में डेजर्ट नेशनल पार्क (डीएनपी) के सुदासरी रेंज में मैदान पर भर्ती होने वाली पहली महिला गार्ड थीं। डेजर्ट नेशनल पार्क में सुदासरी नामक स्थान ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के शरण केंद्र के रूप में विश्व में प्रसिद्ध है। जब सुखपाली पंवार को यहां काम करने का मौका मिला, तो वह इन बेहद शर्मीले पक्षियों की भलाई से सम्बंधित गतिविधियों में लगीं और इस बात का ध्यान का ध्यान दिया की माँ-पक्षी को पानी की तलाश में दूर की यात्रा नहीं करनी पड़े।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के अंडे उन जानवरों से खतरे में हैं जो उन पर कदम रख सकते हैं या जंगली कुत्ते जो उनके जीवन के लिए खतरा पैदा करते हैं। सुखपाली पंवार ने अपनी 2 साल की बेटी के साथ पक्षी बच्चों की देखभाल की, जबकि वे एक कठिन इलाके में तैनात थे। इसके अलावा, उन्होंने डेटा को सक्रिय रूप से एकत्र करके इस पक्षी से संबंधित अपने रिसर्च कार्य में एक पीएचडी छात्र की भी मदद की।

मिसाल कायम करते हुए आगे बढ़ना



कम आय वाले घर में जन्मी सुखपाली पंवार 5 भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं और उन्होंने शादी के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखी। इससे उन्हें वन विभाग में नौकरी पाने में मदद मिली, जहां वह पूरे समर्पण के साथ जानवरों की देखभाल करती हैं। एक बार, उसे एक नीलगाय को बचाने के लिए देर रात के घंटों के दौरान ड्यूटी पर बुलाया गया और उसने पूरी लगन से अपना कर्तव्य निभाया। समय के साथ-साथ सुखपाली ने वन्यजीवों की विविधता का ज्ञान अर्जित कर किया है और विभिन्न जीवों का रेस्क्यू भी कर लेती हैं। आज सुखपाली वन विभाग में काम करने वाली हर महिला के लिए प्रेरणा का श्रोत है तथा इनके सुदासरी में रहने के बाद अब वहां रहने के लिए कई महिलाये तैयार हैं। हालाँकि उनकी सास सुरक्षा को लेकर शुरू में चिंतित थी, लेकिन पंवार ने जानवरों को बचाने में जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उस पर उसे अधिक गर्व था। हम सुखपाली को उनके बुलंद हौसलों और भविष्य में यूँ ही निडर होकर कार्य करने ले लिए धन्यवाद और शुभकामनाये देते हैं।