16वीं शताब्दी में बना जयपुर का पन्ना मीना का कुंड एक चलायमान कुआं है, जो की करीब 450 साल पुराना माना जाता है। हालाँकि राजस्थान के नक़्शे पर स्थित काफी सारे किलों से महत्त्व में अलग इस ऐतिहासिक स्थापत्य ने अपने सौन्दर्यात्मक आभा की वजह से पर्यटकों के मन में वर्षों से अपनी जगह बना ली है। गुलाबी शहर से लगभग 14 किलोमीटर दूर इस आठ मंज़िला संरचना की भूवैज्ञानिक सटीकता में आप भी अपने रचनात्मक ह्रदय को संलग्न कर सकते हैं।

एक चौकोर आकार की संरचना की चारों दीवारों पर बनी हुई सीढ़ियां और उत्तरी छोर की तरफ एक कमरा है, पन्ना मीना का कुंड ऐतिहासिक रूप से थके हुए यात्रियों और व्यापारियों के लिए आराम करने की जगह है, क्यूंकि बावड़ी के अंदर का तापमान समान रूप से कम है। यह भी प्रचलित है की शादी और त्योहारों के पहले होने वाली धार्मिक समारोह यहां कराये जाते हैं।

महाराजा जय सिंह के शासनकाल में निर्मित



एक स्थानीय जानकार के अनुसार यह कुआँ 'महाराजा जय सिंह' के शासन काल में बना था, और इसका नाम उनके राज्य में सेवा करने वाले एक पन्ना मिया नामक 'किन्नर' के नाम पर रखा गया था क्यूंकि उनका इस बावड़ी को बनाने में उनका एकमात्र योगदान था। कथाओं में यह भी प्रचलित है की यह कुआँ इसीलिए बना था ताकि 'आमेर' के लोग यहां से पानी इकठ्ठा कर सकें, जो की बाद में पास के बने मंदिरों में इस्तेमाल किया जाता था।

यद्यपि राज्य की आधी भूमि शुष्क रेगिस्तानी मिट्टी पर होने के कारण राजस्थान में बावड़ियां होना नयी बात नहीं हैं, लेकिन फिर भी पन्ना मीना का कुंड का अपने गहरे भड़कीले पीले रंग और आधुनिक जीवन में अपनी योग्यता रखने के कारण एक विशेष महत्त्व रखता है।

पन्ना मीना कुंड जाने के लिए 'आमेर फोर्ट' से पैदल रास्ता है तो आप एक ऐसी योजना बना सकते हैं जिसमें आप इन दोनों ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा कर सकें। इसके अलावा यहां कोई एंट्री का शुल्क नहीं है, और किसी स्थानीय व्यक्ति की मदद लेकर आप इस लोकेशन पर आसानी से पहुंच सकते हैं। पन्ना मीना कुंड के बारे में एक स्थानीय मान्यता यह भी है, की आप जिन सीढ़ियों से नीचे आएंगे उनसे वापस ऊपर नहीं जा पाएंगे। अब वास्तव में यह मान्यता सच है या नहीं यह तो वहां जाकर ही आपको देखना पड़ेगा। तो देर किस बात की निकल पड़िये अपने दोस्तों के साथ ऐसे कई रोमांचक तथ्यों के बारे में जानने के लिए।

नॉक नॉक (Knock Knock)



अगर आप कुछ ऐसे दृश्यों को ऊंचाई से देखना चाहते हैं, जो किसी मनमोहक कलाकृति जैसे दिखते हों, तो गोरख्गद की ट्रेक ही वह यात्रा है जो आपको ज़रूर करनी चाहिए। तो जल्द से जल्द उन ट्रैकिंग वाले जूतों को निकालिये जिससे आपको जब पहाड़ की ऊंचाई से कोई सुरम्य दृश्य अपने कैमरे में कैद करना हों तो आपके पैरों में कोई तकलीफ़ न हो।

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