राजस्थान एक ऐसा राज्य है जहां पर्यटकों के लिए पर्यटन स्थलों की भरमार है। राजस्थान में किलों और महलों के साथ, राजस्थान के पर्यटन नक़्शे पर पहले से ही बहुत भीड़ है। इसलिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि 'चूरू' जैसा एक छोटा शहर अज्ञात रह जाए। बेहद विस्तृत थार डेजर्ट (Thar Desert) के किनारे स्थित एक छोटा सा शहर चूरू आपको अपने पुरातन और रहस्य्मय आकर्षण की ओर खींच लेगा। रेत के टीलों के बीच एक ठंडी राहत देता यह शहर आज के समकालीन समय और अतीत के शानदार युग को जोड़ती हुई कड़ी के रूप में स्थापित है, और इस स्थान में दोनों समय की सर्वश्रेष्ठ विशेषताओं का सम्मलेन है।

चूरू शहर 1120 ईस्वी में खोजा गया था.



उत्तर पश्चिम राजस्थान के ऐतिहासिक शिखावत क्षेत्र में स्थित, चूरू समुद्र तल से 292 मीटर (958 फीट) की ऊंचाई पर है। चारों ओर घूमती रेत के टीलों के साथ, आसपास के लोगों को सदियों से अपनी महिमा से आकर्षित करते हुए चूरू की सहज सुंदरता और अद्वितीय वास्तुकला वास्तव में देखने योग्य है। चूरू का आकर्षण चुंबकीय और विशिष्ट है, जो आपको एक अतुलनीय आभा तक ले जाने की क्षमता रखता है, जो जीवन से बड़े और आपकी कल्पना से परे है !

अपने सभी अन्य जिलों की तरह, इस शहर की शाही संबद्धता को भी वर्षों से कथाओं के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया गया है। जानकारों के अनुसार, यह शहर 1120 ईस्वी में राजपूतों के 'निर्बान वंश' (Nirban clan of Rajputs ) द्वारा खोजा गया था और राज्य के बांग्लादेश क्षेत्र के राजा चूरमान के बाद इसका नाम चूरू रखा गया था। तब से, इसका संरक्षण राठौड़ राजपूतों और शेखावत के अधिकारियों के माध्यम के द्वारा किया जा रहा है।



चूरू में घूमना किसी रहस्यमय भूतिया शहर में घूमने जैसा है। एक छोटी परिधि (perimeter) के भीतर 100 से अधिक हवेलियां हैं, और प्रत्येक हवेली दूसरे की तुलना में अधिक भव्य है। इन पर बने चित्र और फ्रेस्को (Fresco) मालिकों के जीवन और उस समय की नई अवधारणाओं को दर्शाते हैं, जैसे ट्रेन में यात्रा करना, कार चलाना आदि। फ्रेस्को चमकीले और जीवंत हैं, और ऐसे प्रतीत होते हैं जैसे कि दशकों से बने होने के बजाय हाल ही में चित्रित किए गए हैं। शहर की गलियों से गुजरते हुए, जहां भी आंखें पड़ती हैं, वहां एक पोस्टकार्ड पर चित्रित होने योग्य दृश्य नज़र आता है।

शाही स्पर्श.



हालांकि पुरानी हो चुकी और दुनिया के द्वारा भुला दी गई यह जगह हवेलियों के रूप में इसकी सुंदरता को बढ़ाती है। यहां पर, आपको सैकड़ों छोटी खिड़कियों के साथ 'कन्हैया लाल बागला' की हवेली और 'सुराणा हवेली' की महिमा निश्चित रूप से देखने लायक है। इसके अलावा, चूरू का उत्तम सेठानी में जोहरा और घंटाघर भी अहम् स्थान हैं।



लेकिन यहीं सब कुछ खत्म नहीं होता, 'ताल छापर सेंक्चुरी' , जगह बदलती हुए रेत के टीले और एक रेगिस्तानी सफारी आपके अंदर के खोजकर्ता को बाहर निकलेगी। आप सालासर बालाजी मंदिर भी जा सकते हैं, और वहां की जीवंत बाजारों में सैर करके राजस्थान की जीवंत और उत्साहपूर्ण संस्कृति को और करीब से जान सकते हैं।

कैसे पहुंचे चूरू



चूरू जिला NH-65 के मार्ग से राज्य के अन्य शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, बीकानेर रेल लाइन छोटे शहर से होकर गुजरती है, जो इसे मुख्यधारा की यात्रा में शामिल करती है। यदि आप गुलाबी शहर की राजधानी से अपनी यात्रा शुरू कर रहे हैं, तो आप सड़क और यातायात भीड़ के आधार पर आरजे एसएच 37, या छोटे मार्ग एनएच 52 के माध्यम से यात्रा कर सकते हैं।

नॉक नॉक (Knock Knock)



यहां की इन हवेलियों के दरवाजे कुछ ऐसे हैं जिन्हें आप पूरे दिन निहार सकते हैं। भव्य पैमाने पर और या फिर कला के संदर्भ में, कोई भी दो दरवाजे एक जैसे या सामान्य नहीं हैं। यह सूर्यास्त देखने के लिए एक आदर्श स्थान है, एक तरफ क्षितिज पर अपने रंगो को बदलता हुआ आसमान और दूसरी तरफ पानी पर बढ़ते हुए चन्द्रमा का दृश्य आप कभी नहीं भूल पाएंगे। इसलिए शहरी जीवन से कुछ पल दूर जाकर और मानव दृष्टि से अनदेखे रह गए इस शहर चूरू को देखिये जो वास्तव में आपके संपूर्ण ध्यान का हकदार है !

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