जयपुर में अंबाबारी के पास द्रव्यवती के एक हिस्से में जलकुंभी ने कब्ज़ा कर लिया है। नदी को साफ करने के लिए, जयपुर नगर निगम (जेएमसी) ने तेजी से फैल रहे खरपतवार को रोकने के लिए एक स्वच्छता अभियान शुरू किया है। सीवरेज डिस्चार्ज और बदबूदार पानी को खरपतवार के अधिक फैलने का प्रमुख कारण माना जा सकता है। करीब पांच साल पहले इसी जलकुंभी से अननसागर झील पर भी हमला हुआ था। प्रशासन ने खरपतवार हटाने के लिए काफी मेहनत की लेकिन इस मौसम में यह दोबारा फैल गई है। 

जलकुंभी का नदी पर दुष्प्रभाव

जलकुंभी से पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है जिससे मछलियों की वृद्धि के अलावा अन्य जलीय वनस्पतियों और जीवों का दम घुटने लगता है। यह पानी के बहाव को 20 से 40% तक कम कर देती है। बड़े बांधों में जलकुंभी बिजली उत्पादन को प्रभावित करती है। जलकुंभी की उपस्थिति के कारण पानी के “वाष्पोत्सर्जन” की गति 3 से 8 प्रतिशत तक अधिक बढ़ जाती है। जिससे पानी का जल स्तर तेजी से कम होने लगता है।

इस खरपतवार के फैलने से होने वाले नुकसान को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं। नगर पालिका व स्थानीय निकाय निकाय बुलडोजर व जलीय खरपतवार साफ करने वाली मशीन लगा कर उचित कार्रवाई कर रहे हैं।

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