महामारी की तबाही के बीच, देश भर के कुछ नेकदिल लोग करुणा और सेवा भाव से एक जुट होकर हम सबके लिए इस स्थिति को आसान बनाने की कोशिशों में लगे हुए हैं। जयपुर में चल रहे कल्याणकारी प्रोग्रामों के एक भाग के रूप में शहर भर के वालंटियर दिवंगत लोगों को सम्मानपूर्वक विदाई देने के प्रयासों में लगे हुए हैं। व्यापक पहल के माध्यम से, वे उन कोरोना पीड़ितों को उचित तरह से दाह संस्कार / दफनाने का प्रयास कर रहे हैं, जिनके रिश्तेदार या तो अस्पताल में भर्ती हैं या संक्रमित हैं।

मृत नागरिकों को सुरक्षित और सम्मानपूर्वक अलविदा देने का वादा


जयपुर के एक संवेदनशील व्यक्ति 'आर.के सहारा' ने लगभग 60 कोरोना पीड़ितों की दाह संस्कार की प्रक्रिया को पूरा किया है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि वह हरिद्वार में उन लोगों के लिए राख भी विसर्जित करेंगे, जिन्होंने कोरोना के चलते अपने सभी रिश्तेदारों को खो दिया है। एक अन्य वालंटियर, किशन सोनी, जो एक सरकारी स्कूल में फिजिकल इंस्ट्रक्टर हैं, उन्होंने पिछले साल अप्रैल से लगभग 60 शवों के अंतिम संस्कार में मदद की है। जबकि उनके परिवार को उनके लिए डर था, उन्होंने उन दुर्भाग्यपूर्ण व्यक्तियों के लिए यह जिम्मेदारी निभाई, जिनके पीछे इस दुनिया में उनका कोई नहीं है।.

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान 'सोनी' के पास सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कई लोगों के अंतिम संस्कार में सहायता के लिए अनुरोध किये गए। उन्होंने बताया कि वह पहले यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि क्या मृतक का कोई रिश्तेदार है और उनसे संपर्क करने की कोशिश करते हैं। यदि अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं है, तो वह सभी बताए गए एहतियाती उपायों के अनुसार प्रक्रिया को पूर्ण करते है।

Knock Knock

नागरिकों को विषम परिस्थितियों से बचाने के अलावा, इन संवेदनशील व्यक्तियों ने इंसानियत की मिसाल कायम की है। ऐसे मुश्किल समय में जब लोग अपनों को खोने के दर्द से होकर गुज़र रहे हैं तब यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने आस-पास के लोगों की हर तरह से मदद करें। वर्तमान स्थिति के भयावह परिणामों को देखते हुए, हम अपने अंदर की इंसानियत को जगाकर ही महामारी से लड़ने के लिए सक्षम बन सकते हैं ।