कमजोर पौधों और पेड़ों के लिए एक उद्धारकर्ता की भूमिका निभाते हुए, जयपुर में एक 'ट्री एम्बुलेंस' ने शहर भर में विभिन्न वनस्पतियों को बचाने के लिए सात साल की लंबी यात्रा तय की है। दो दोस्तों द्वारा शुरू की गई इस पहल को बड़ी संख्या में पर्यावरण के प्रति जागरूक लोगों का समर्थन मिला है, जिन्होंने शहर के हरित आवरण को समृद्ध करने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 100 व्यक्तियों के एक समूह 'टीम 10' ने हाल ही में विद्यानगर क्षेत्र में 1 लाख पेड़ लगाए।

स्वयंसेवक आधारित समूह द्वारा लाखों पेड़ों की देखभाल की जा रही है


कथित तौर पर, टीम 10 अपने संसाधनों से 3 लाख पेड़ों की देखभाल कर रही है। यह उल्लेख किया गया है कि समूह इस उद्देश्य के लिए सरकार से कोई वित्तीय सहायता नहीं लेता है। सात साल पहले लकड़ी के व्यापारी सुशील अग्रवाल ने अपने दोस्त गोपाल वर्मा के साथ मिलकर इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी। प्रारंभ में, वे बीमार पौधों की सहायता के लिए एक कार में कुदाल, एक पानी की टंकी, कीड़े मारने की दवाई और खाद ले जाते थे। रिपोर्ट के अनुसार, सुशील विद्यानगर को शहर के सबसे हरे भरे क्षेत्र में बदलना चाहते हैं।

34 देशों की यात्रा करने के बाद, उन्होंने महसूस किया है कि भारत के पास प्रचुर मात्रा में वनस्पतियों का उपहार है। उनका कहना है कि नागरिकों को यह चुनना होगा कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या छोड़ना चाहते हैं, भौतिकवादी विकास से भरी दुनिया या एक सुरक्षित और सुंदर प्राकृतिक वातावरण।

एक हरित और समृद्ध कल की ओर


अर्पण लोक विकास समिति के रूप में संस्थापित, समूह हर सुबह पौधों के लिए 2-3 घंटे कल्याण कार्य करता है। कथित तौर पर, इसपर हर महीने लगभग 2 लाख का खर्च आता है, जिसके माध्यम से 10-11 किमी की दूरी पर पड़े पौधों को संरक्षित किया जाता है। इसके अलावा, यह समुह पर्यावरण को हरा-भरा बनाए रखने के लिए कई परियोजनाएं चला रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वयंसेवकों ने 500 सीमेंट कूड़ेदान स्थापित करने और अतीत में इसी तरह की अन्य पहलों को चलाने के अलावा स्वच्छता और सौंदर्यीकरण अभियान में भाग लिया है।

नॉक-नॉक

व्यापक आर्थिक विकास के वर्तमान युग में, हमने प्रकृति को बेहद नुकसान पहुंचाया है, इस बीच यह पहल निश्चित रूप से प्रशंसा की पात्र है। एक बेहतर कल के लिए हम सभी को अपने व्यक्तिगत स्तर पर पर्यावरण को संरक्षित करने में अपना योगदान देना चाहिए।

- पीटीआई द्वारा मिली जानकारी के अनुसार