पहले से चल रही महामारी के बीच जयपुर में कुछ लोगों में 'ब्लैक फंगस' (Mucormycosis) संक्रमण की खबरें सामने आई हैं। कथित तौर पर, पिछले 12 घंटों में 14 रोगियों में संक्रमण का पता चला है और एसएमएस अस्पताल में ईएनटी विभाग के प्रमुख के अनुसार, पिछले साल अगस्त से दिसंबर तक, लगभग 24 ऐसे मामले सामने आए थे। हालांकि इन रोगियों में से अधिकांश का समय पर डॉक्टरों द्वारा इलाज किया गया था, लेकिन कुछ ने इस संक्रमण के कारण अपनी आंखों की रोशनी खो दी है। ब्लैक फंगस की उत्पत्ति और नतीजों ने नागरिकों में चिंता पैदा कर दी है।

Mucormycosis या ​​काला फंगस क्या है ?

सीडीसी के अनुसार, Mucormycosis जिसे कभी-कभी zygomycosis कहा जाता है, एक गंभीर लेकिन दुर्लभ फंगल संक्रमण है जो mucormycetes नामक मोल्ड के समूह के कारण होता है। ये कवक (fungi) पूरे पर्यावरण में रहते हैं, विशेष रूप से यह मिट्टी में और सड़ने वाले कार्बनिक पदार्थों में, जैसे कि पत्तियां, खाद के ढेर या सड़ी हुई लकड़ी में पाई जाती है।

वातावरण में ऐसे फंगल स्पोर्स (fungal spores) के संपर्क में आने से लोगों को ब्लैक फंगस हो जाता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति ऐसे बिजाणुओं में सांस लेता है तो उसे ब्लैक फंगस, फेफड़ों में संक्रमण या साइनस (sinus) के रूप में हो सकता। ब्लैक फंगस के यह प्रकार उन लोगों में होते हैं, जिन्हें या स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं हों या वह लोग जो ऐसी दवाईयां लेते हैं, जिससे शरीर की रोगाणुओं और बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम होती हो। त्वचा के पर किसी प्रकार की चोट (कटने, छिलने या जलने) के बाद भी यह फंगस त्वचा में प्रवेश कर सकता है और इससे ब्लैक फंगस या Mucormycosis शरीर के अंदर विकसित हो सकता है।

हालांकि कोविड-19 और Mucormycosis के बीच सीधा संबंध अभी भी स्थापित नहीं हुआ है, लेकिन यह लंबे समय तक corticosteroid के उपयोग, प्रतिरक्षा संबंधी समस्याएं, ब्लड शुगर के स्तर पर ध्यान न देना, पहले से शरीर में कई बिमारियां, ब्लैक फंगस का कारण हो सकती हैं। एक अधिकारी के बयान के अनुसार, पहले मृत्यु दर 30% -50% के बीच थी, लेकिन अब इसमें गिरावट आने के बाद यह 10% पर पहुंच गई है। अधिकारी ने आगे बताया कि ब्लैक फंगस की इस दूसरी लहर के दौरान अधिक लोग अपनी दृष्टि खो रहे हैं।