एक प्रगतिशील शुरुआत के रूप में, भिखारियों के एक समूह को जयपुर में महामारी से प्रभावित नागरिकों के लिए भोजन तैयार करने के काम में लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 40 ऐसे व्यक्ति खाना पकाने की इस प्रक्रिया में शामिल हैं, जो शहर के 4,000 से अधिक लोगों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं। कथित तौर पर, राजस्थान पुलिस ने इन भिखारियों को इकट्ठा करने के लिए एक पहल शुरू की थी, जिसके बाद, उन्हें राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम (RSLDC) की योजना के तहत खाना पकाने की ट्रेनिंग दी गयी।

ज़रूरतमंद लोगों के लिए मुफ्त सेवाएं


ये जनवरी के महीने की बात है जब जगतपुरा के सोपान इंस्टिट्यूट (SOPAN Institute) में ये सभी भिखारी एनरोल हुए थे। अब सोपान इंस्टिट्यूट ने अक्षय पत्रा फाउंडेशन के साथ मिलकर खाना बनाने और बांटने की ड्राइव शुरू की हैं। कथित तौर पर ये ट्रेंड व्यक्ति लगभग 4000 लोगों की मुफ्त में मदद कर रहे हैं। यह पहल बहुत से बीमार और वंचित लोगों को सहायता प्रदान कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार प्रोडक्शन सुपरवाइजर सौरव शर्मा ने बताया की सभी व्यक्ति कुछ दिनों के मार्गदर्शन के बाद काफी कुछ सीख गए हैं और उन्होंने सारी जिम्मेदारियां अच्छे से संभाली है। ये कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति इस योजना में पूरी तरह प्रयासरत हैं और वे इसके साथ जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं और एक नयी शुरुआत करना चाहते हैं ।

एक परोपकारी पहल की लिए बिना किसी निजी फायदे के काम रहे हैं


रसोई में खाना बनाने से लेकर मैनजमेंट और मरम्मत के कामों तक ये व्यक्ति सभी कुछ भली भांति संभाल रहे हैं और 15 लोगों के बैच के साथ 2 शिफ्टों में काम करके ये सभी ज़रूरतमंद लोगों के लिए बेहतर खाने का प्रबंधन सुनिश्चित कर रहे हैं। जिन व्यक्तियों के लिए पहले अपनी ही ज़रूरतों का ध्यान रखना मुश्किल था अब वे एक परोपकारी पहल की ओर काम रहे हैं वो भी किसी निजी फायदे की उम्मीद के बिना।

इस स्थान पर सभी महत्पूर्ण साफ़ सफाई के स्टैण्डर्ड का ध्यान रखा जाता है। उचित सैनिटाइज़ेशन हो या फिर रोजमर्रा के कपड़ों की साफ़ सफाई और सभी अधिकारी यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं की वर्कर्स का टेम्परेचर और हेल्थ भी चेक होती रहे। मौजूदा अनिश्चित परिस्थितियों को देखते हुए, अनियंत्रित संक्रमण की संभावनाओं को कम करने के लिए इस तरह के कदम आवश्यक हैं।