जब महामारी के मौजूदा समय में स्कूल बंद हैं तब राजस्थान के ऊंट राज्य के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में छात्रों तक शिक्षा पहुंचा रहे हैं। 'रेगिस्तान के जहाज' दूरस्थ क्षेत्रों में जहाँ इंटरनेट सुविधा की कमी है वहां छात्रों के लिए नियमित नोट्स, पाठ्यपुस्तकें और स्टेशनरी ले जा रहे हैं। इसके अलावा,उन सभी विद्यार्थियों के लिए जिनके पास ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा नहीं है,ये ऊंट उन तक आवश्यक संसाधनों और सामग्रियों के साथ साथ शिक्षकों को भी पहुंचा रहे हैं ताकि उनकी शिक्षा में रुकावटें न आएं।

'आओ घर से सीखें' कैंपेन और दी स्माइल 3 प्रोजेक्ट



हैरानी की बात यह है कि गर्म मौसम की स्थिति के बीच शिक्षक खेतों में या सड़क के किनारे छात्रों के लिए कक्षाएं लेते हैं। इस पहल में शिक्षकों की दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता को देखते हुए, इसे स्थानीय लोगों,जन प्रतिनिधियों के साथ-साथ शिक्षा मंत्री सहित कई व्यक्तियों से सराहना मिली है। इस कार्यक्रम के चालकों से बात करते हुए मंत्री ने कहा, 'सभी चुनौतियों का सामना करते हुए निभाए जा रहे कर्तव्य के प्रति समर्पण को मैं सलाम करता हूं।'

आओ घर से देखें अभियान और स्माइल 3 परियोजना के तहत राजस्थान में छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। राज्य के कुछ क्षेत्रों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं की कमी को देखते हुए, उन्हीं कार्यक्रमों के तहत नवीनतम प्रयास शुरू किया गया है।

इसके एक हिस्से के रूप में, शिक्षक सभी शिक्षा से सम्बंधित गतिविधियों को सुनिश्चित करने के लिए दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों का दौरा कर रहे हैं। इस पहल के तहत ऊंटों को तैनात किया गया है क्योंकि गहरे अंदरूनी इलाकों में वाहनों के संचालन के लिए पर्याप्त सड़कें नहीं हैं, इसलिए ऊंटों पर बैठकर शिक्षक 10-12 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं।

इस कदम के ज़रिये छात्रों का स्कूल के साथ निरंतर संपर्क बना रहेगा



स्कूल के प्रिंसिपल रूम सिंह जाखड़ ने कहा, "कुछ शिक्षक वास्तव में छात्रों को समय पर नियमित नोट्स पहुँचाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उनमें से कुछ मुनाराम ढाका, बिहारीलाल ढाका और बीरमाराम बाना हैं। हमने पहुंचने के लिए 100 छात्रों का चयन किया है। मैं सलाम करता हूं ऐसे भावुक शिक्षकों की टीम को " इसके अतिरिक्त, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक भी इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि छात्रों का स्कूल के साथ निरंतर संपर्क बना रहे।

छात्रों के बीच शैक्षिक संसाधनों के वितरण के अलावा, उन्हें मास्क और सैनिटाइज़र के उचित उपयोग के बारे में भी बताया जा रहा है। उनके प्रयासों को देखते हुए ग्राम पंचायतों और स्थानीय लोगों ने भी शिक्षकों की सराहना की है। बाड़मेर के जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक बनवारी लाल बैरवा ने कहा, ''रेगिस्तानी इलाकों में संसाधनों की कमी के बावजूद शिक्षक बच्चों तक पहुंच रहे हैं, जो बहुत अच्छा और सराहनीय कार्य है।"