राजस्थान के कई जिलों में कोरोना से रिकवर हो गए, या फिर रिकवर हो रहे मरीज़ों में म्यूकोर्मिकोसिस (Mucormycosis ) यानी की (ब्लैक फंगस) की समस्या बहुत अधिक देखा जा रही है, और इसी लिए राज्य सरकार ने बुधवार को ब्लैक फंगस बीमारी को महामारी (Epidemic) घोषित कर दिया है। ब्लैक फंगस के मामले कोरोना संक्रमित मरीज़ों में एक पोस्ट कोविड समस्या के रूप में तेज़ी से बढ़ रहे हैं, और इसका इलाज अब कोरोना के इलाज में शामिल कर दिया गया है। ब्लैक फंगस को महामारी का स्टेटस देकर राज्य को इसके विस्तार के खिलाफ चिकित्सीय प्रोटोकॉल तैयार करने में आसानी होगी।

राजस्थान में दुर्लभ ब्लैक फंगस संक्रमण लगातार बढ़ रहा है


राज्य के प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सचिव, द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन में, राजस्थान महामारी अधिनियम 2020 के तहत ब्लैक फंगस को महामारी और गंभीर बीमारी घोषित किया गया है। इसी तरह का आदेश पहले कोरोना संक्रमण के लिए भी पारित किया गया था। जबकि यह रोग बहुत दुर्लभ है, यह अक्सर कोरोनो वायरस रोगियों में एक पोस्ट कोविड समस्या के रूप में पाया जाता है। कई मरीज़ों में कोरोना के बाद यह संक्रमण देखा गया है, इसी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने यह घोषणा की।

ब्लैक फंगस संक्रमण के घातक प्रभावों को कम करने के लिए राजस्थान सरकार ने जयपुर और अन्य जिलों में कईं कोशिशें की हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (Rajasthan Medical Services Corporation Limited) ने पहले ही भारत सीरम एंड वैक्सीन्स लिमिटेड (Bharat Serums and Vaccines Limited) को ब्लैक फंगस ट्रीटमेंट में काम आने वाली दवाई एम्फोटेरिसिन बी (Amphotericin B) की 2,500 शीशियों का ऑर्डर दे दिया है।

म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस, एक गंभीर और दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है, आमतौर पर ब्लैक फंगस इंफेक्शन तब होता है जब लोग वातावरण में फंगल स्पोर्स के संपर्क में आते हैं। यह कट, खरोंच, जलन या किसी अन्य त्वचा पर लगी चोट के माध्यम से प्रवेश कर जाता है और त्वचा पर विकसित हो जाता है। यह मुख्य रूप से लंबे समय तक स्टेरॉयड के उपयोग करने से या अनियंत्रित डायबिटीज, कैंसर, एचआईवी / एड्स या ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन और वोरिकोनाज़ोल थेरेपी जैसी स्थितियों के कारण कम इम्युनिटी लेवल वाले लोगों में अधिक होने की संभावना है।