रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में दिव्यांगो की सुविधा के लिए सफारी जीप में रैंप लगाए हैं, यह पूरे देश में ऐसा करने वाला यह पहला राष्ट्रीय उद्यान होगा। रैंप वाली जिप्सी को पूर्व वन्यजीव वार्डन बालेंदु सिंह द्वारा डिजाइन किया गया है। यह नवाचार राज्य वन विभाग द्वारा 5 दिसंबर 2020 को जारी अधिसूचना का परिणाम है, जिसमें कहा गया है कि सभी राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और चिड़ियाघरों को दिव्याांगो के लिए अनुकूल बनाया जाना चाहिए।

इलेक्ट्रिक स्विच की मदद से रैंप से चढ़-उतर पाएंगे विकलांग लोग



दिव्यांग लोग रणथंभौर में अब व्हीलचेयर पर बैठकर जीप सफारी की सवारी कर सकते हैं, क्योंकि वाहन अब उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से सुसज्जित हैं। व्हीलचेयर के लिए जगह बनाने के लिए वाहनों की सीटों को मोड़ा जा सकता है और व्हीलचेयर से चलने वाले यात्री की सुरक्षा के लिए सीटबेल्ट लगाए गए हैं। इसके अलावा, एक इलेक्ट्रिक स्विच की मदद से, विकलांग व्यक्ति रैंप के माध्यम से आसानी से वाहन पर चढ़ और उतर सकते हैं।

इस जीप को विकसित करने के पीछे की प्रेरणा

बालेंदु सिंह, एक पैरा-एथलीट थे, जिन्होंने निशानेबाजी प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उस दौरान जब उन्होंने विदेशों में इस तरह की व्यवस्था देखी तो उनको भी ऐसी ही सफारी गाड़ी बनाने की प्रेरणा मिली, जिसका उपयोग दिव्यांग लोग भी कर पाएं। महामारी की स्थिति में कुछ सुधार देखने के बाद, पर्यटकों के लिए रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के खुलने के बाद यह सुविधा उपलब्ध होगी।

अन्य प्रावधान

राज्य वन विभाग ने 5 दिसंबर 2020 को विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम 2016 के अनुसार एक अधिसूचना भी जारी की थी। इस अधिसूचना में कहा गया है कि सभी राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और चिड़ियाघरों को दिव्यांगों के लिए अनुकूल बनाया जाना चाहिए। इस आदेश के अनुपालन में सफारी जीपों में रैंप को लगाया गया है।

इसके अलावा, इस अधिसूचना में विकलांग व्यक्तियों का मार्गदर्शन करने और साथ देने के लिए साथ में दो गाइड भेजने का भी प्रावधान है। इस कदम दिव्यांगो द्वारा स्वागत किया गया है, क्योंकि उन्होंने अतीत में इस तरह के टूर पर शारीरिक रूप से कई कठिनाइयों का सामना किया है।