राजस्थान के अवनि लेखारा, देवेंद्र झाझरिया और सुंदर सिंह गुर्जर ने टोक्यो 2020 पैरालंपिक खेलों में भारत के लिए क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर पूरे देश का गौरव बढ़ाया। जहां लेखरा स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बन गईं, वहीं दो बार की स्वर्ण पदक जीतने वाले भाला फेंक खिलाड़ी, झाझरिया ने इस साल रजत पदक जीता, और गुर्जर ने कांस्य पदक अपने नाम किया। टोक्यो पैरालंपिक 2020 में भारतीयों द्वारा जीते गए कुल आठ पदकों के साथ, देश पदक तालिका में 26वें स्थान पर पहुंच गया।

अवनी ने कुल 621.7 अंकों के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया

जयपुर की रहने वाली, आरयू लॉ की छात्रा, 19 वर्षीय अवनि का 11 साल की उम्र में भयानक एक्सीडेंट हो गया था, जिसके बाद उन्हें कमर से नीचे तक लकवा मार दिया था। इन सब कठिनाइयों के बावजूद वह पैरालंपिक और ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला एथलीट बनने में सफल रही। टोक्यो 2020 के क्वालीफाइंग दौर में, अवनी ने 103 स्कोर के साथ शॉट्स की सीरीज़ शुरू की और 102.8, 104.9, 102.1 और 104.5 तक उनका स्कोर गया, कुल 621.7 अंकों के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

 जेवलिन थ्रोअर वाले देवेंद्र झाझरिया ने तोड़ा अपना ही पुराना रिकॉर्ड

राजस्थान के चूरू जिले में पैदा हुए जेवलिन थ्रोअर वाले देवेंद्र झाझरिया ने 64.35 मीटर तक भाला फेंक कर खुद अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिसने उन्हें टोक्यो 2020 पैरालंपिक खेलों में रजत पदक दिलाया। महज 8 साल की उम्र में बिजली के तार से हाथ गंवाने के बाद झाझरिया ने इस साल के रजत से पहले 2004 और 2016 में स्वर्ण जीतने के लिए बहुत मेहनत की है। 

2004 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में 62.15 मीटर के शानदार थ्रो के साथ अपना पहला स्वर्ण पदक जीतने के बाद, वह 2016 में भारत के लिए एक और स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे। विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण और रजत पदक, एशियाई पैरा खेलों में रजत,  2002 दक्षिण कोरिया में FESPIC खेलों में और दुबई में 2016 की एशिया-ओशिनिया चैंपियनशिप में एक स्वर्ण पदक ने झाझरिया के करियर को गति दी है।

चुनौतीपूर्ण रहा सुंदर सिंह गुर्जर का कांस्य पदक जीतने का सफर

राजस्थान के करौली जिले के रहने वाले सुंदर सिंह गुर्जर एक प्रसिद्ध खिलाड़ी बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए जयपुर चले गए, लेकिन उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। जयपुर के एक प्रसिद्ध कोच, महावीर सिंह द्वारा प्रशिक्षित, सुंदर 2015 तक सामान्य वर्ग में भाला फेंक प्रतियोगिताओं में भाग लिया करते थे। 2016 की एक तूफानी रात में, एक टिन शेड उड़ गया और सुंदर पर गिर गया, जिससे उसका बायां हाथ कट गया और उनका जीवन पूरी तरह से बदल गया।

सुंदर ने उसी वर्ष पैरालिंपिक के लिए आवेदन किया था, लेकिन देर से आवेदन करने के कारण सफल नहीं हो सके, जिससे वह कुछ समय के लिए हतोत्साहित हो गए। बाद में, उन्होंने न केवल जेवलिन थ्रो में भाग लिया, बल्कि डिस्कस थ्रो और शॉट पुट की कला में भी महारत हासिल की और 2017 FAZAA IPC एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स में तीनों खेलों के लिए स्वर्ण पदक जीते। चल रहे पैरालिंपिक में, गुर्जर ने टोक्यो में 64.01 मीटर तक भाला फेंक कर कांस्य पदक जीता है।

भारत के इन खिलाड़ियों ने जीते टोक्यो 2020 पैरालंपिक में पदक

उपर्युक्त पैरा-एथलीटों के अलावा, जेवलिन थ्रोअर सुमित अंतिल ने स्वर्ण पदक जीता, डिस्कस थ्रोअर योगेश कथुनिया ने रजत पदक जीता, टेनिस खिलाड़ी भावना पटेल ने रजत पदक जीता, निषाद कुमार ने हाई जंप टी 47 में रजत और सिंहराज अदाना ने ’10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग एसएच1′ में कांस्य पदक जीता। 

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