कोरोना महामारी ने वैश्विक अर्थव्य्वस्था (global economy) को तबाह कर दिया है, लेकिन ऐसा लगता है की राजस्थान के ऊंटों की लगातार घटती आबादी और नतीजतन राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नया जीवन दिया है। महामारी के चलते पिछले साल से सामजिक दूरी के मानदंड का पालन किया जा रहा है। इसी कारण, राज्य के अंदर नियमित चलने वाले वाहन अब परिवहन का पसंदीदा साधन नहीं रह गए हैं। इस प्रकार, अब ऊँट बड़े समारोहों के लिए जैसे की दूल्हे और उनके परिवारों को विवाह के लिए दुल्हन के गांवों में ले जाने के लिए परिवहन का विकल्प बन गए हैं।

महामारी में काम आ रहे हैं ऊँट!

ऊंट राजस्थान के दूर इलाकों के स्कूली बच्चों के लिए एक शिक्षा का माध्यम बनकर भी उभरे हैं। हालांकि ऐसे छात्रों के पास सड़कें और इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी है लेकिन उनकी शिक्षा में बाधा नहीं आ रही है क्योंकि ये जानवर दूर-दराज के क्षेत्रों में छात्रों के लिए पढाई लिखाई का सारा सामान और स्टेशनरी ले जा रहे हैं।

राजस्थान के ऊंटों की आबादी में गिरावट दर्ज की गयी 

हालांकि, रेगिस्तान के इन जहाजों को मदद की सख्त जरूरत है क्योंकि पिछले कुछ सालों से इनकी आबादी में गिरावट दर्ज की जा रही है। राजस्थान सरकार की 20वीं पशुधन गणना के अनुसार, राज्य में ऊंटों की संख्या 2012 में 3,25,713 से गिरकर 2019 में 2,12,739 हो गई है। यह स्थिति और बड़ी लगती है क्यूंकि इस राज्य में भारत में ऊंटों की आबादी सबसे अधिक है।

आंकड़े बताते हैं कि 1991 तक देश में दस लाख से ज्यादा ऊंट थे और उनकी वर्तमान आबादी इस संख्या की एक चौथाई है। इसलिए, इन जानवरों के बचने की संभावनाएं एक बड़े प्रश्न चिह्न के नीचे लटकी हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीकानेर के पास के कई गांवों में शून्य ऊंट हैं, जहां कुछ साल पहले 500 हुआ करते थे।

 महामारी ऊंटों की आबादी को पुनर्जीवित कर रही है 

इस गिरावट के मुख्य कारणों में से एक है कि नए परिवहन साधनों की शुरुआत के साथ निवासियों को इन जानवरों को अपने आसपास रखने में कोई लाभ नहीं दिखता है। समय और जितने व्यक्तियों को वे ले जा सकते हैं, इस आधार पर देखा जाए तो कार और जीप अधिक कुशल हैं। हालांकि, महामारी के प्रभाव में, ऊंट एक बार फिर यात्रा का चुना हुआ साधन बन गए हैं।

राजस्थान को अपनी सदियों पुरानी परंपराओं तक वापस ले जाते हुए, शादी की पार्टियों में इन जानवरों को नाक की पिन, घुंघरू,रंग बिरंगे वस्त्रों से सजाया जाता है। पहले के राजघरानों के विवाह की तरह अब ऊँट शादी के समारोह का विशेष हिस्सा बन गए हैं। राज्य के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के अलावा, यह नया चलन ऊंट आबादी को पुनर्जीवित करने में भी मदद करेगा।

इस संबंध में एक स्थानीय कैब सेवा,राजपुताना कैब्स के चतुर्भुज सिंह ने कहा- ”आने वाले दिनों में यह थीम काफी डिमांड में होगी। जैसे ही राज्य पूरी तरह से खुल जाएगा, हमारे विदेशी मेहमान भी इसी तर्ज पर बारात के साथ शादी के बंधन में बंधना पसंद करेंगे। यूरोपीय पर्यटक, वैसे भी, रेगिस्तान के ऊँट से प्यार करते हैं।”

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