राजस्थान में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) के उत्पादन को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार विशेष प्रयास कर रही है। हाल ही में, राजस्थान में ऑक्सीजन निर्माण यूनिट्स की स्थापना के लिए अपनी तरह की पहली ‘कैपिटल सब्सिडी स्कीम’ (Capital Subsidy Schem) की घोषणा की गयी। नयी घटनाओं के अनुसार, प्रशासन अब प्राइवेट स्वास्थ्य केंद्रों को भी अपने परिसर में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए विशेष लाभ प्रदान करेगा। इस पहल के तहत न्यूनतम आवश्यक निवेश को आसान बनाया गया है।

प्राइवेट अस्पतालों की जरूरतों को देखते हुए लिया फैसला

राज्य के बुनियादी ढांचे के उद्योग विभाग ने प्राइवेट अस्पताल के प्रवक्ताओं के साथ विचार-विमर्श के कई सेशन आयोजित किये। इन सेशंस के माध्यम से उन्हें प्राइवेट अस्पतालों की जरूरतों को समझने में मदद मिली, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। विशेष स्कीम के लागू होने से यह उम्मीद की जा सकती है कि चिकित्सा केंद्रों को काफी फायदा होगा।

उद्योग मंत्री ने कहा, “चूंकि पैकेज के तहत ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने वाले अस्पतालों को शामिल करने और उनके निवेश में सहयोग करने के लिए मेडिकल की फील्ड से लगातार अनुरोध किया गया था, इसीलिए हमने अब प्राइवेट अस्पतालों को भी यह लाभ प्रदान करने का फैसला किया है। सरकार का यह कदम हमें मेडिकल रूप से और मज़बूत होने में मदद करेगा।”

50 लाख रुपये तक की कैपिटल सब्सिडी का लाभ उठाया जा सकता है

इस योजना के एक हिस्से के रूप में, यदि कोई चिकित्सा केंद्र चल रहे वित्तीय वर्ष के दौरान ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए निवेश करता है, तो वह प्लांट और मशीनरी में निवेश की 25% कैपिटल सब्सिडी प्राप्त कर सकता है। या फिर ₹40,000 प्रति एनएम3/घंटा या मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन सीमा के एम3/घंटे के बराबर कैपिटल सब्सिडी, जो भी कम हो, उसका लाभ उठाया जा सकता है। विशेष रूप से, इस योजना के तहत अधिकतम ₹50 लाख तक का लाभ प्राप्त हो सकता हैं। इसके अलावा, इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए निवेशकों ने 30 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच प्लांट स्थापित किए होंगे और उत्पादन शुरू किया होगा।

यह कहा गया है कि अस्पताल में स्थापित किए जा रहे मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट में प्रतिदिन लगभग 30 ऑक्सीजन सिलेंडर का उत्पादन करने की क्षमता होनी चाहिए। अस्पतालों के अलावा, अन्य उद्यम भी प्लांट और मशीनरी और अन्य उपकरणों में निवेश की गई राशि के 25 प्रतिशत की कैपिटल सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं, जो अधिकतम 50 लाख रुपये की सीमा के अधीन है। 

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