झालाना की सबसे खूबसूरत तेंदुआ क्लियोपेट्रा तीन साल की थी, जब वह 2019 में लापता हो गई थी। दो साल बाद, वन विभाग की गहन जांच के बाद, नीली आंखों वाली लेपर्ड यहां देखी गई। झालाना के तेंदुए विशेषज्ञों ने कई वन क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाए थे, जिसके कारण 13 जून को गलता क्षेत्र के सुमैल के जंगलों में क्लियोपेट्रा को देखा गया।

क्लियोपेट्रा को आखिरकार 10,000 फोटो की जांच के बाद खोजा गया

वन विभाग ने जयपुर के आसपास के विभिन्न जंगलों में ट्रैप कैमरों से प्राप्त लगभग 10,000 तस्वीरों की जांच की गई। अनुपस्थिति की लंबी अवधि को देखते हुए, कई लोगों ने ‘झालाना की रानी’, क्लियोपेट्रा को मृत मान लिया था, लेकिन दो बार पुष्टि करने के बाद, विभाग ने इस लेपर्ड के जीवित होने की घोषणा की। विशेषज्ञों ने सूचित किया है कि युवा तेंदुआ अपने क्षेत्र की तलाश में भटक गई थी, जो कि उप वयस्क तेंदुओं के बीच एक सामान्य व्यवहार है।

अधिकारियों ने बताया कि तेंदुआ गलता क्षेत्र में है और वह स्वस्थ दिख रही है। वन विभाग इसके मूवमेंट पर नजर रख रहा है, और साथ ही इसके भविष्य को लेकर योजना भी बना रहा है।

क्लियोपेट्रा फ्लोरा की संतान है और उसका एक भाई जूलियट है, जिसने कई बार सामने आकर पर्यटकों को आकर्षित किया। क्लियोपेट्रा की अनुपस्थिति ने कई लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, जिसके बाद वन विभाग ने इसकी खोज शुरू कर दी। इस खोज के दौरान, एक अध्ययन में पाया गया कि 2012 से 2021 तक झालाना से लगभग 32 तेंदुए मर गए या गायब हो गए। इनमें से लगभग 25 तेंदुए उप वयस्क (sub adults) या शावक थे जो अपने क्षेत्र की तलाश में गायब हो गए या मर गए।

तेंदुओं के लिए किया जाएगा वन क्षेत्र का विस्तार

वर्तमान में, यह क्षेत्र 20 वर्ग किमी में रहने वाले 36 तेंदुओं का प्राकृतिक आवास है। अधिकारियों ने नए शावकों की स्थिर जन्म दर को देखते हुए कहा कि एक शहरी जंगल (urban forest) के लिए यह घनत्व बहुत अधिक है। जैसे-जैसे अधिक शावक नियमित रूप से पैदा होते हैं, उप-वयस्कों (sub adults) और वयस्कों को झालाना लेपर्ड सफारी पार्क से बाहर धकेला जा रहा है, जिसके बाद अंततः यह क्षेत्रीय लड़ाई में मारे जा रहे हैं।

अध्ययन बताते हैं कि एक नर तेंदुए को आदर्श रूप से कम से कम 5 वर्ग किमी क्षेत्र की आवश्यकता होती है। इसलिए, वन विभाग इन जंगली बिल्लियों के लिए लगभग 700-हेक्टेयर निवास स्थान का प्रावधान करने के लिए, आसपास के जंगलों के विकास पर विचार कर रहा है, जिसमें गलता क्षेत्र भी शामिल है। यह तेंदुओं को इधर-उधर भटकने या पड़ोसी रिजर्व में घूमने से रोकेगा, जिससे उनकी सुरक्षा में आसानी होगी।

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