राजस्थान में मेडिकल रिसर्च के बुनियादी ढांचे के दायरे को बढ़ाते हुए जयपुर में जल्द ही इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड वायरोलॉजी की स्थापना की जाएगी। वायरल इन्फेक्शन की जांच और इलाज के नए तरीके खोजने के लिए यह सुविधा व्यापक रिसर्च और विश्लेषण में सहायता करेगी। वर्तमान में, भारत में पुणे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी है और यह नया संस्थान देश की रिसर्च की सुविधाओं को मजबूत करेगा। महामारी से अचानक उत्पन्न हुई विषम परिस्थितियों को देखते हुए, राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है।

विधायकों ने चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने के लिए धनराशि देने को कहा

राज्य सरकार ने रविवार को सभी दलों की वर्चुअल बैठक में इस संस्थान की स्थापना के निर्णय की घोषणा की। रिपोर्ट के अनुसार, विधायकों को कुल 600 करोड़ वापस किए जाएंगे, जो राज्य में टीकाकरण कार्यक्रम के लिए उनके आवंटन से लिए गए थे। गौरतलब है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने पर राशि खर्च करने के लिए कहा गया है। कथित तौर पर, वे अगले साल से अन्य विकास कार्यों के लिए राशि का उपयोग करने में सक्षम होंगे।

इसके साथ ही, राज्य के अधिकारियों ने इस बात का विशेष ध्यान दिया है कि टीकाकरण लक्ष्य समय पर प्राप्त हो जाएं। टीका लगवाने वाले लोगों की अधिकतम संख्या वाले राज्यों में से एक होने के नाते, राजस्थान में अब तक 2,16,92,192 खुराकें दी जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र में देखे जा रहे व्यापक अभियान यह सुनिश्चित करेंगे कि आने वाले दिनों में यह संख्या कई गुना अधिक हो।

जबकि राजस्थान में महामारी की स्थिति को नियंत्रण में लाया गया है, वायरस के आगे आने वाले प्रसार से निपटने के लिए टीकाकरण सबसे महत्वपूर्ण हथियार है। इसलिए सभी नागरिकों के लिए यह जरूरी है कि वे इसके बारे में जागरूकता फैलाने के अलावा जल्द से जल्द टीका लगवाएं।

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