राजस्थान के जेल अधिकारियों ने कैदियों और उनके परिजनों के लिए सबसे अधिक वर्चुअल मुलाकातों की व्यवस्था की है। देश में कोरोना की दूसरी लहर के गहन प्रभाव के बावजूद भी 1 अप्रैल से 5 जून के बीच इकट्ठा किए गए आंकड़ों से पता चलता है की अधिकारियों ने देश में 1,00,746 ई-मीटिंग आयोजित की हैं। राजस्थान के बाद, बिहार ने सबसे अधिक 58,891 ई-मीट आयोजित की। इस महामारी के दौरान आइसोलेशन ने हम सभी को मानवीय संपर्क के महत्व का एहसास कराया है, इसलिए अधिकारियों ने यह ध्यान दिया की कैदियों को भी अपने परिवारों के साथ समय बिताने का मौका मिले।

सुप्रीम कोर्ट की एडवाइजरी पर की गई पहल

राजस्थान जेल के जनरल डायरेक्टर ने कहा कि जेल प्रशासन ने हाई कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और सलाह का पालन करते हुए इन ई-मीटिंग की व्यवस्था की। इन गाइडलाइंस में कहा गया है कि परिवार के सदस्यों से दूर रहने से कैदियों में डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।

इन आदेशों के पालन करते हुए, एक पहल शुरू की गई और यह सुनिश्चित किया गया कि प्रत्येक कैदी सप्ताह में कम से कम एक बार अपने परिवार के सदस्यों के साथ मुलाक़ात करे। हाई कोर्ट द्वारा यह निर्देश जारी किए जाने से पहले, कैदियों को अपने परिजनों से फोन पर बात करने की अनुमति थी।

देश भर में सर्वश्रेष्ठ जेल व्यवस्था

टाटा ट्रस्ट की एक न्याय रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान को 2021 में जेल व्यवस्था के मामले में नंबर एक राज्य के रूप में चुना गया है। हालांकि, 2020 रैंकिंग जारी होने पर राजस्थान 12 वें स्थान पर था और यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

पूरे भारत में जेल ई-मीट का आलम 

राजस्थान के जेल प्रशासन ने देश में सबसे ज्यादा वर्चुअल मुलाकातें कराई। सूची में तीसरे स्थान पर, बिहार के बाद, दिल्ली में 34,368 और इसके बाद गुजरात में करीब 33,821 कराई गयीं हैं। मध्य प्रदेश में 19,132 वर्चुअल मीटिंग कराई गयीं ।

इसके अलावा, यह बताया गया है कि असम, मणिपुर, महाराष्ट्र, हरियाणा, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, सिक्किम और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जैसे राज्यों में कैदी अपने परिवारों से पूरी तरह दूर रहे। दूसरी ओर, पंजाब, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और गोवा जैसे राज्यों में, अधिकारी इन ई-मीटिंग के संबंध में 50 के बेंचमार्क को पार नहीं कर सके।

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