राजस्थान के राजसमंद क्षेत्र के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली भावना जाट ने आखिरकार एक अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने के अपने सपने को साकार कर लिया है। भावना ने आखिरकार टोक्यो ओलंपिक में आयोजित होने वाली 20 किमी रेस वॉक स्पर्धा में भाग लेने के लिए क्वालीफाई कर लिया है। रूढ़ीवादी मानसिकता, पूर्वाग्रहों और वित्तीय बाधाओं से लड़ते हुए, रेसवॉकिंग (पैदल चाल) में राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम करने वाली भावना जाट अब अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में अपने देश के लिए पदक जीतने का लक्ष्य रखती हैं।

चुनौतिपूर्ण रहा भावना का सफर

भावना जाट की यात्रा राजस्थान के काबरा गांव से शुरू हुई, जहां उन्होंने कई बाधाओं का सामना किया और अपने लिए सफलता की राह बनाई। उन्होंने फरवरी 2020 में रांची में आयोजित नेशनल ओपन रेस वॉकिंग चैंपियनशिप में तत्कालीन राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित करने के लिए सुर्खियां बटोरीं। भावना ने 1 घंटे 29 मिनट और 34 सेकंड में इवेंट पूरा करके टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया, जो 1 घंटे 31 मिनट के क्वालीफाइंग मार्क के भीतर था।

सपना के समर्पण ने सभी लोगों की भद्दी टिप्पणियों से होने वाली मानसिक पीड़ा को हरा दिया। उनके परिवार, विशेष रूप से उनके एथलीट भाई- प्रकाश जाट के समर्थन के परिणामस्वरूप उनके करियर की अब तक की उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त हुई हैं। एक संघर्षपूर्ण सफर तय करते हुए, उन्होंने अपनी यात्रा शुरू करने के बाद से 9 साल के भीतर ओलंपिक प्रतिभागी के रूप में जगह बनाई।

अपनी सफलता से बदली लोगों की मानसिकता

भावना जाट को आर्थिक परेशानियों के कारण कॉलेज छोड़ना पड़ा, हालांकि, उनको अपनी उपलब्धियों के लिए रेलवे द्वारा रोजगार के रूप में इनाम भी मिला। इसके अलावा, उनकी नवीनतम उपलब्धि से मिली पहचान ने उनके गांव के लोगों की मानसिकता को बदलने में मदद की है। अब उनसे कई लोग संपर्क कर रहे हैं जो अपनी बेटियों को रेस वॉकिंग में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं। इससे ये उम्मीद की जा सकती है कि भविष्य में हम कई और ऐसी ही प्रतिभाशाली लड़कियों को विभिन्न खेलों में देश का नाम रोशन करते हुए देखेंगे।

आईएएनएस द्वारा मिली जानकारी के अनुसार

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