राजस्थान सरकार ने एक ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन सेल (टीपीसी) स्थापित करने का फैसला किया है जिसका उद्देश्य समुदाय के खिलाफ अपराधों को रोकना होगा। इसको लेकर बुधवार को एक बयान जारी किया गया, जिसमें कहा गया है कि यह सेल पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के कार्यालय से काम करेगी। ट्रांसजेंडर समुदाय के हितों की रक्षा के प्रयास में राज्य सरकार द्वारा यह पहल की गई है।

इस सेल में 6 पुलिस कर्मियों को लगाया जाएगा

यह बताया गया है कि मुख्यमंत्री ने एक ट्रांसजेंडर सुरक्षा सेल बनाने का फैसला किया है और इसके लिए फाइनेंस विभाग द्वारा रखे गए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के अनुसार, एक पुलिस इंस्पेक्टर, एक सब-इंस्पेक्टर, दो कांस्टेबल, एक काउंसलर या साइकोलॉजिकल काउंसलर और एक डेटा एंट्री ऑपरेटर सहित कुल छह पुलिस कर्मी कॉन्ट्रैक्ट  के आधार पर सेल में काम करेंगे।

ये पद नए बनाये गए हैं और आदेश जारी होने की तारीख से फरवरी 2022 तक अस्थायी रूप से प्रभावी रहेंगे। इस वर्टिकल को सौंपे गए अधिकारी स्टेट-लेवेल पर ट्रांसजेंडर न्याय बोर्ड और जिला ट्रांसजेंडर न्याय समिति के बीच समन्वय करेंगे ताकि इस समुदाय से आने वाले लोगअधिकारों की रक्षा की जा सके।

इसके अलावा, यदि आवश्यक हो, तो ट्रांसजेंडर समुदाय के एक प्रतिनिधि को गैर-आधिकारिक और महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में आमंत्रित किया जा सकता है। राज्य के शीर्ष पुलिस प्राधिकरण के कार्यालय से कार्य करने वाले इस सेल का गठन ट्रांसजेंडरों के अधिकारों के संरक्षण अधिनियम-2019 के तहत किया गया है।

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