हाल ही में दर्शकों को जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (जेआईएफएफ) में प्रदर्शित डॉक्यूमेंट्री,‘द प्राइस ऑफ चीप’ में शहर की प्रख्यात रिहैबिलिटेशन फिजिशियन, डॉ. पूजा मुकुल को देखने का अवसर मिला। यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता और पटकथा लेखक बैरी स्टीवंस द्वारा निर्देशित एक प्रभावशाली फिल्म है, जो फैशन सप्लाई चेन्स में गुम मॉर्डन स्लेव्स की कहानियों को बयां करती है।

फिल्म ने दुनिया भर में जीते कई पुरस्कार

फिल्म में यह दिखाया गया है कि कैसे गरीबी और कर्ज माता-पिता को अपने छोटे बच्चों को कारखानों और कपड़ा मिलों में काम करने के लिए भेजने के लिए मजबूर करते हैं, जहां उन्हें वास्तविक रूप से बंधक बनाकर रखा जाता है। यह फिल्म बच्चों को बचाने के लिए उन असुरक्षित कारखानों पर छापेमारी करने वाले एक्टिविस्ट और उन बचाए गए बच्चों के जीवन के पुनर्निर्माण की कोशिश पर आधारित है। फिल्म ने दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में कुल 17 पुरस्कार जीते हैं।

फिल्म के बारे में बताते हुए, डॉ. पूजा कहा कि, “यह विचारोत्तेजक है, जो हमें उन कपड़ों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करता है जो हम खरीदते हैं। इस बात पर ध्यान देने की आवश्यकता है कि कपड़े कहाँ से आते हैं, जो लोग उन्हें बनाते हैं, और कैसे हमारे विकल्प उनके जीवन को प्रभावित करते हैं।”

फैशन सप्लाई चेन्स में गुम मॉर्डन स्लेव्स की कहानी को बयां करती है फिल्म

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