वर्तमान महामारी ने कई ग्रामीण परिवारों की कमाई के ज़रिये छीन लिए है। इस स्थिति के दुष्प्रभाव सबसे अधिक उन बच्चों को भुगतने पड़ रहे हैं,जिनका पढ़ाई का सपना आर्थिक तंगी के कारण अधर में लटक गया है। राजस्थान में, जब बुजुर्ग अपनी बेटियों को स्कूल भेजने का खर्च नहीं उठा सकते थे, तो उन्होंने उन पर शादी करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। हालाँकि, अक्टूबर 2020 में एक विद्रोह हुआ, जिसमें मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की 1500 लड़कियों को शामिल किया गया जो राज्य सरकार से उचित आर्थिक सहायता के साथ स्कूल वापस जाने में सहायता मांग रही हैं। इस साल 9 और 10 मार्च को एएमआईईडी ने जयपुर में इस अभियान से जुड़ी सभी लड़कियों का स्टेट लेवल पर एक सम्मेलन आयोजित किया और इसे राजस्थान राइजिंग मंच नाम दिया।

राजस्थान राइजिंग मंच की शुरुआत


युवा लड़कियों की शिक्षा के अधिकार के लिए लड़ रहे इस पॉजिटिव आंदोलन को अलवर मेवाड़ शिक्षा और विकास संस्थान के रूप में अपना पहला समर्थक मिला। इस नॉन प्रॉफिट संगठन का प्राथमिक उद्देश्य लड़कियों को शिक्षा प्रदान करना है, यही वजह है कि इन्ही लड़कियों में से एक लड़की, प्रियंका ने इस कठिन समय में अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए उनसे संपर्क किया।

एएमआईईडी ने इस अवसर पर कदम बढ़ाया और दस लड़कियों को स्वास्थ्य और शिक्षा पर परामर्श और ट्रेनिंग प्रदान की। इसके अलावा, एएमआईईडी ने सभी लड़कियों के माता-पिता को उन्हें एक ऐसे आंदोलन का हिस्सा बनने की अनुमति भी दिलवाई जो भविष्य में उनकी स्कूली शिक्षा को निःशुल्क बना सके। इसके साथ, शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान में एक अनूठा आंदोलन शुरू हुआ।

जल्द ही 50 से अधिक पड़ोसी गांव एक साथ आ गए और इन गांवों के समूह नेताओं ने एक कार्य योजना तैयार की, जिसमें से दलित-आदिवासी पिछड़ा वर्ग किशोरी शिक्षा अभियान का जन्म हुआ। वे ग्राम प्रधान, विधायक और अन्य व्यक्तियों सहित राजनीतिक प्रमुखों तक भी पहुँचे जिन्होंने इस अभियान पर सकारात्मक जवाब दिया।

इन टीनएज लड़कियों की मांगों की सूची


एएमआईईडी के सहयोग से छात्राओं ने नियमित मीटिंग करनी शुरू की और अपनी मांगों की एक लिस्ट बनाई। इन मांगों में अध्ययन के लिए समय पर स्कॉलरशिप और कक्षा 12 तक मुफ्त शिक्षा का प्रावधान शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि कॉलेज में प्रवेश करने वालों को एक बार में ₹ 5,000 की स्कॉलरशिप दी जानी चाहिए, ताकि वे किताबें और अन्य ज़रूरी सामान खरीद सकें।

वर्तमान में, सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली स्कॉलरशिप किश्तों में दी जाती है और सभी खर्चों को कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए, इन लड़कियों द्वारा रखी गई मांगें यह सुनिश्चित करती हैं कि लड़कियों को अपने परिवार पर कोई आर्थिक तनाव डाले बिना अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने और उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिले।

नॉक-नॉक

राजस्थान राइजिंग मंच का उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा से संबंधित मुद्दों के साथ-साथ जेंडर और जातिगत भेदभाव को समझना था, जिसका लड़कियों को सामना करना पड़ता है। इस अभियान की सफलता ग्रामीण राजस्थान में लड़कियों की स्थिति को बदल सकती है। खासकर अपनी लोकतांत्रिक स्थापना के कारण यह अभियान वास्तव में लड़कियों के लिए,लड़कियों द्वारा शुरू किया गया एक अमूल्य अभियान है।