मुख्य बातें:

  • राजस्थान के सभी जिलों में पेयजल जांच प्रयोगशालाओं को मिला ‘एनएबीएल एक्रीडिशन’।
  • इस बात की घोषणा जलदाय मंत्री द्वारा की गई।
  • सभी नागरिकों के लिए 16 बिंदुओं पर आधारित पेयजल गुणवत्ता परीक्षण की दर 1000 रुपये से घटाकर 600 रुपये की गई।
  • पेय जल की गुणवत्ता की जांच 16 बिंदुओं पर आधारित होगी।

राजस्थान में जलदाय विभाग की ओर से प्रदेश के सभी 33 जिला मुख्यालयों पर स्थापित पेयजल गुणवत्ता जांच प्रयोगशालाएं को राष्ट्रीय स्तर की स्वतंत्र संस्था से ‘एनएबीएल एक्रीडिशन’ मिलने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। सोमवार को इस बात की घोषणा राज्य के जलदाय मंत्री महेश जोशी ने की।

 पेयजल गुणवत्ता परीक्षण का शुल्क घटाया गया

जलदाय मंत्री ने बताया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आमजन को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार का बड़ा कदम है। उन्होंने आगे बताया कि अधिक से अधिक लोगों को पेय जल की गुणवत्ता की जांच के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 16 बिंदुओं पर आधारित पेयजल गुणवत्ता परीक्षण का शुल्क 1000 से घटा कर 600 रुपए की गई है।

इन 16 बिंदुओं के आधार पर होगी जांच

प्रदेश में सभी जिलों में स्थापित पेयजल जांच प्रयोगशालाओं में , नाइट्रेट, थर्मो टॉलरेंट कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया, टोटल कोलोफॉर्म बैक्टीरिया, आर्से निक, आयरन, सल्फेट, क्लोराइड, रेजिड्यूअल क्लोरिन, टोटल हार्डनेस, टोटल अल्केलिनिटी, टर्बिनिटी, टोटल डिजोल्वड सॉलिड, पीएच, कलर और ऑडर के 16 बिन्दुओं पर आधारित गुणवत्ता जांच करवाई जा सकेगी।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में पेयजल जांच सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए चीफ केमिस्ट कार्यालय में दस नए पद सृजित किए गए हैं। इसमें एक अतिरिक्त पर चीफ केमिस्ट, अधीक्षण केमिस्ट के तीन पद और सीनियर केमिस्ट के 6 पद शामिल हैं। प्रदेश में पेयजल जांच सुविधाओं के लिए 67 करो़ड़ की राशि का प्रावधान किया गया है। जयपुर में राज्य स्तरीय प्रयोगशाला भवन बनाने के लिए 3 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है।

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