स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप, इंदौर प्रशासन ने जिले के ग्रामीण क्षेत्रों को ओडीएफ + टैग प्राप्त करने में सहायता करने का निर्णय लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय शासी निकाय का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक ग्रामीण क्षेत्रों को ओडीएफ + स्थानों के रूप में अधिसूचित किया जाए। इस समय सीमा के साथ, भारत का सबसे स्वच्छ शहर अपने पर्यावरण को और बढ़ाने के लिए जिले के सभी कोनों में स्वच्छता को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए जनता को जोड़ा जाएगा

जानकारी के अनुसार कलेक्टर मनीष सिंह ने जिले के विभिन्न हिस्सों के ग्राम सरपंचों और जिला पंचायत अधिकारियों की बैठक को संबोधित किया। इसमें उन्होंने जनप्रतिनिधियों से नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों को लागू करने को कहा। इसके अलावा, अधिकारियों को ग्रामीण निवासियों के सहयोग से योजनाओं पर काम करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मार्च 2020 के अंत तक ओडीएफ + टैग का लक्ष्य पूरा हो जाए।

इस बैठक में जिला प्रशासन ने सरपंचों से सुझाव व अनुशंसा भी मांगी। कथित तौर पर, उन्होंने ग्रामीण निवासियों से संपत्ति और स्वच्छता कर की वसूली के लिए गांव के अधिकारियों को हर संभव सहायता का वादा किया है।

इंदौर को मिला भारत का ग्रामीण मल कीचड़ उपचार प्लांट

रिपोर्ट के मुताबिक, कलेक्टर ने देपालपुर तहसील के गांव काली बिलोद में भारत के पहले ग्रामीण मल कीचड़ उपचार प्लांट के शुभारंभ के बारे में बताया। शहर के अपशिष्ट प्रबंधन बुनियादी ढांचे (waste management infrastructure) में एक महत्वपूर्ण वृद्धि को चिह्नित करते हुए, यह सुविधा शहर में स्वच्छता में सुधार करेगी। इंदौर में महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की गति को देखते हुए कहा जा सकता है कि शहर के अधिकारी हर संभव तरीके से आसपास के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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