मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर में कानून व्यवस्था को बेहतर करने के लिए और आम जनता को एक उत्कृष्ट पुलिस सेवा देने के लिए रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन दोनों शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने का निर्णय किए जाने की घोषणा की।

भोपल और इंदौर में जनता की सुरक्षा के लिए और बढ़ते अपराध और अपराधियों पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस कमिशनरेट सिस्टम की व्यवस्था को लाया जा रहा है। पुलिस कमिशनरेट सिस्टम से पुलिस को जिला प्रशासन के मजिस्ट्रियल पावर मिल जाएंगे जिससे पुलिस और बेहतर तरीके से अपना काम बिना किसी दबाव के कर सकेगी।

कमिशनरेट सिस्टम लागू होने से पुलिस को मिलेगी एग्जीक्यूटिव मैजिस्टेरियल पावर

पुलिस कमिशनरेट सिस्टम लागू होने से कानून व्यवस्था से जुड़े हर मामले पर पुलिस कमिश्नर खुद निर्णय ले सकेंगे और कमिश्नर सिस्टम लागू होते ही एसडीएम और एडीएम को दी गई एग्जीक्यूटिव मैजिस्टेरियल पावर पुलिस को मिल जाएगी।

इससे जिला प्रशासन स्तर पर जैसे डीएम के पास रुकी हुई फाइलों को अनुमति लेने के लिए पुलिस अधिकरियों और कर्मचारियों को भटकना नहीं पड़ेगा, इस तरह के तमाम काम अब पुलिस विभाग के अधीन होंगे।

इसके साथ ही पुलिस का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) बढ़ेगा और रसूका, गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट जैसी धाराओं को लगाने के लिए डिएम से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। पुलिस इस तरह की किसी भी कार्रवाई को करने के लिए और उससे जुड़े निर्णय लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होगी।

कमिशनरेट सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस कमिश्नर ही पुलिस फोर्स का मुखिया होता है

इंडियन पुलिस एक्ट 1861 के भाग 4 के अंतर्गत डीएम के पास पुलिस पर नियंत्रण के अधिकार भी होते हैं और इस पद पर आईएएस अधिकारी बैठते हैं। लेकिन जब पुलिस कमिशनरेट सिस्टम लागू हो जाता है तो यह सभी अधिकार पुलिस कमिश्नर को मिल जाते हैं जो एक आईपीएस रैंक का अधिकारी होता है।

पुलिस कमिशनरेट सिस्टम में पुलिस कमिश्नर सर्वोच्च पद होता है। पुलिस कमिश्नर को ज्यूडिशियल पॉवर भी होती हैं, सीआरपीसी के तहत कई अधिकार इस पद को मजबूत बनाते हैं, इस प्रणाली में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस ही मजिस्ट्रेट पॉवर का इस्तेमाल करती है।

किसे बनाया जाता है पुलिस कमिश्नर ?

एडीजी स्तर के सीनियर आईपीएस अधिकारी को पुलिस कमिश्नर बनाकर तैनात किया जाता है और महानगर को कई जोन में विभाजित किया जाता है। हर जोन में डीसीपी की तैनाती होती है, जो एसएसपी की तरह उस जोन में काम करता है, वो उस पूरे जोन के लिए जिम्मेदार होता है, सीओ की तरह एसीपी तैनात होते हैं जो 2 से 4 थानों को देखते हैं।

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