इसमें कोई शक नहीं की शानदार गाड़ियां आकर्षण का केंद्र होती हैं और भारत के पूर्व राजघरानों में हमेशा सभी प्रकार की शानदार गाड़ियों का शौक रखा गया है। भारतीय महाराजाओं के लिए समाज में अपनी प्रतिष्ठा, अपनी शाही परंपरा और विरासत को बनाए रखने के लिए धूमधाम और विलासिता का जीवन उनके रोज़ाना की ज़िन्दगी का हिस्सा था। ग्लैमर और हैसियत से सीधे तौर पर जुड़े होने के कारण इन शाही परिवारों में गाड़ियों का हमेशा शौक रहा है।

आज हम यहां भारत के सबसे प्रतिष्ठित और प्रसिद्ध शाही परिवारों में से एक, इंदौर के होल्कर राजवंश के शानदार कार संग्रह का एक वर्चुअल दौरा करेंगे। इंदौर में स्थित होल्कर शासक परिवार के पास देश में अब तक देखे गए सर्वश्रेष्ठ गाड़ियों का संग्रह मौजूद था। साथ ही, भारत की पहली महिला ड्राइवरों में से एक कोई और नहीं बल्कि महाराजा तुकोजीराव होल्कर की पत्नी महारानी चंद्रावतीबाई होल्कर थीं।


होल्कर राजवंश के महाराजा तुकोजीराव होल्कर के पुत्र और उत्तराधिकारी,यशवंत राव होल्कर को गाड़ियों का बेहद शौक था। वे गाड़ियों के सच्चे प्रेमी थे और उन्होंने भारत में गाड़ियों का सबसे आश्चर्यजनक संग्रह बनाने के लिए बहुत जद्दोजहद की। यहां तक कि मैसूर या पटियाला के महाराजा या हैदराबाद के निजाम के पास भी कारों का इतना बड़ा संग्रह नहीं था। महाराजा यशवंतराव होल्कर के लिए एक बढ़िया और शानदार कार को प्राप्त करने के लिए लागत कोई मुद्दा नहीं था"

शानदार गाड़ियां का ऐसा संग्रह जो विदेशों में भी प्रसिद्ध था


गाड़ियों के प्रति महाराजा यशवंतराव होल्कर का जुनून ऐसा था कि उन्होंने कारों के बारे में अच्छा तकनीकी ज्ञान अर्जित किया था। गाड़ियों के विभिन्न भाग किस प्रकार से काम करते हैं और कार में कुछ समस्याएं पैदा होने पर उनका निवारण कैसे किया जाए,इन सब मुद्दों पर उन्हें अत्यधिक ज्ञान था। अधिकतर उन्होंने कस्टम मेड कारों को प्राथमिकता दी और हर विवरण, कार के हैंडल के डिजाइन, प्रभावशाली इंटीरियर, अच्छे अपहोल्स्ट्री, बेहतर पेट्रोल खपत के लिए कार के आकार और डिजाइन, फ्रंट ग्रिल के डिजाइन, फुट रेस्ट आदि पर ध्यान दिया। इसमें कोई शक नहीं की उनकी बेहतरीन तरीके से डिजाइन की गयीं कारें अमेरिका और अन्य विदेशी देशों में बेहद प्रसिद्ध थीं। बेंटले, अल्फा रोमियो और रोल्स रॉयस जैसी प्रभावशाली,और बहुत महंगी कारों के अपने विशाल आकर्षक संग्रह की देखभाल करने के लिए उनके पास बड़ी संख्या में प्रशिक्षित लोग थे।

महाराजा यशवंत राव होल्कर के पास 3 शानदार कारें थीं, एक 4.5 लीटर लैगोंडा (Lagonda), एक ओपन दो सीटर स्पोर्ट्स बॉडी और एक एयरोफिल कूप बेंटले (aerofoil coupe Bentley)। उनके पास सेवन सीटर 1931 टाइप 41बी पियर्स एरो भी थे, जिसमें एक फेटन बॉडी, नीले रंग में एक बुगाटी, एक डेलाहाय, एक J12 हिस्पानो सूजा (J12 Hispano Suiza) और तीन अल्फा रोमियो। 1954 में, महाराजा ने 2-दरवाजे वाले टियरड्रॉप स्पोर्ट्स बेंटले आर टाइप कॉन्टिनेंटल का ऑर्डर दिया जिसमें होल्कर साम्राज्य के ठाठ भाथ के अनुकूल सभी विशेषताएं थी, और केवल यूएसए में इसका उपयोग किया गया था। उनकी पसंदीदा कार 4.5 लीटर 1936 बेंटले थी। कुल मिलाकर, महाराजा के पास छह बेंटले गाड़ियां थीं। कुल मिलाकर, उनके पास लगभग 40 से 60 थीं। ड्यूसेनबर्ग सहित सभी होल्कर कारों में "एचएससी" नंबर प्लेट थे जैसे "एचएससी -1" "एचएससी -3" आदि जो "होलकर स्टेट कार" के प्रतीक थे।

उस समय की सबसे महंगी गाड़ी


1931 में जब 28 वर्षीय महाराजा यशवंतराव होल्कर ने एक कस्टम मेड Duesenberg गाड़ी अमेरिका से आर्डर करी, तो वह उस समय बनने वाली सबसे महंगी गाड़ी थी। Duesenberg को प्यार से duesy कहा जाता था जो एक अमेरिका की लक्ज़री गाड़ियों की कंपनी थी, जो की 1913 से लेकर 1937 तक कार्यात्मक थी और अपनी शानदार हाई क्वालिटी की गाड़ियों के लिए मशहूर थी। इस कार को लंदन मोटर शो में प्रस्तुत किया गया जहां इसे बहुत प्रशंसा मिली। इसे जल्द ही भारत भेज दिया गया। इस कार ने माणिक बाग पैलेस में शाही गैरेज की शोभा बढ़ाई।

राजा शानदार रूप से इतने समृद्ध थे कि उसके पास बेवर्ली हिल्स, कैलिफ़ोर्निया (जहां हॉलीवुड सितारों और स्टूडियो मोगल्स के भव्य निवास हैं) में अपनी कारों के लिए विशाल स्थान के साथ एक अद्भुत निवास स्थान था। उनके पास पेरिस और फ्रेंच रिवेरा में भी आवास थे। इंदौर के शासक और उनकी पत्नी का यूरोप और अमेरिका के अभिजात्य वर्ग के साथ घनिष्ठ संपर्क था।


होल्कर शायद भारत के इतिहास में सबसे लोकप्रिय रॉयल्टी में से एक हैं, खासकर क्योंकि उन्होंने बहुत योगदान दिया और उनकी अपनी एक विशिष्ट शैली भी थी। होल्कर साम्राज्य के गाड़ियों के संग्रह में सभी भारतीय शाही परिवारों में सबसे महंगी लक्जरी कारों थीं और इसके लिए वे दुनिया भर में जाने जाते थे।