कला संबंधित गतिविधियों के लिए एक सुप्रसिद्ध केंद्र, जयपुर के जवाहर कला केंद्र (जेकेके) की स्थापना 1993 में राजस्थानी कला और शिल्प के संरक्षण के उद्देश्य से की गई थी। यह एक शानदार मंच है जो कलाकारों और उनकी कृतियों का खूबसूरत समागम है। इसका हर कोना हमेशा कलाकारों की उपस्थिति से गुलज़ार रहता है। आइए जेकेके के गलियारों में इत्मीनान से टहलें और कुछ इसकी खूबसूरत बारीकियों की सराहना करें!

जवाहर कला केंद्र की वास्तुकला की नौ ग्रहों से प्रेरित है


अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रसिद्ध भारतीय वास्तुकार स्वर्गीय चार्ल्स कोरिया को जवाहर कला केंद्र की वास्तुकला को डिजाइन करने का श्रेय दिया जाता है। जेकेके भवन की वास्तुकला नवग्रह (नौ ग्रहों) से प्रेरित है। इस भवन की वास्तुकला अपने-आप में उत्कृष्ट कला का एक बेहतरीन उदाहरण है।

नवग्रह के डिजाइन पर आधारित जेकेके के मुख्य परिसर में छह प्रदर्शनी दीर्घाएं, एक ओपन-एयर थिएटर, ऑडिटोरियम, डॉर्मिटरी और एक कॉफी हाउस है। इनमें से प्रत्येक खंड संबंधित ग्रह की विशेषताओं को दर्शाता है, उदाहरण के लिए, पुस्तकालय बृहस्पति खंड में स्थित है क्योंकि यह ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक है। इसके अलावा, केंद्रीय गुंबद की छत पर जैन पौराणिक कथाओं पर आधारित भित्तिचित्र कार्य किए गए हैं।

मुख्य जेकेके भवन के निकट शिल्प ग्राम है, जहां अक्सर हाक्राफ्ट मेलों, पुस्तक मेलों, राजस्थानी लोकरंगों व हस्तशिल्प कार्यक्रमों का आयोजन बड़े स्तर पर किया जाता है। 9.5 एकड़ के इस ग्रामीण परिसर में कुल 6 झोपड़ियाँ स्थित हैं जो राजस्थान के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं- ब्रज (भरतपुर), हाडौती (कोटा), आदिवासी (डूंगरपुर), रेगिस्तान (बाड़मेर और बीकानेर), शेखावाटी (सीकर) और केंद्र ( जयपुर)।

नॉक-नॉक


महामारी की स्थिति में सुधार होते ही जेकेके का भ्रमण करें और यहां प्रदर्शित कलात्मकता के दर्शन करें। चंद्र खंड में स्थित कॉफी हाउस, भारतीय खगोल विज्ञान के कम ज्ञात पहलुओं को प्रकट करता है। इसके अलावा यहां कॉफी की सुगंध का आनंद लेते हुए, अपने कलात्मक विचारों के साथ कुछ समय व्यतीत करें।

समय: 10 AM to 9 PM (कर्फ्यू प्रतिबंधों के चलते इसमें बदलाव हो सकता है)

पता: 2, जवाहरलाल नेहरू मार्ग, कॉमर्स कॉलेज के सामने, झालाना डोंगरी, जयपुर