मुख्य बिंदु

मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली पेंच टाइगर रिजर्व की विश्व विख्यात कॉलरवाली बाघिन की मृत्यु हो गई है।
उसने अपने पूरे जीवन काल में 29 टाइगरों को जन्म दिया जो एक विश्व रिकॉर्ड बताया जाता है।
उसकी मौत पर ईको विकास समिति कर्मझिरी की अध्यक्ष शांता बाई ने मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी।
11 साल में आठ बार गर्भधारण कर 29 शावकों को जन्म देकर बाघिन ने देश में सबसे अधिक शावकों को जन्म देने का कीर्तिमान बनाया।
इस कारण वह ‘पेंच की रानी’ व ‘सुपर माम’ के नाम से पर्यटकों में मशहूर हो गई।
वर्ष 2008 में लगाए गए रेडियो कालर के कारण उसे कालर वाली बाघिन का नाम भी मिला।
बाघिन ने रिजर्व के कर्माझिरी के सिताघाट, फायर लाइन क्षेत्र में अपना दबदबा अंत तक बनाए रखा।

मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व की ”सुपर मॉम” कॉलरवाली बाघिन का बीते 15 जनवरी को निधन हो गया। मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा दिलाने में कॉलरवाली बाघिन का बड़ा योगदान था। बाघिन ने अपने पूरे जीवन काल में 29 शावकों को जन्म दिया था जो एक विश्व रिकॉर्ड बताया जाता है। पेंच टाइगर रिजर्व के पूर्व फील्ड डायरेक्टर विक्रम सिंह परिहार बताते हैं, “सितंबर 2005 में जन्मी इस बाघिन ने वर्ष 2008 से लेकर 2018 तक 10 साल में 29 शावकों को जन्म दिया, जो एक कीर्तिमान है।

दुनिया में किसी भी बाघिन ने इतने शावकों को जन्म नहीं दिया। इस लिहाज से यह “सुपर मॉम” बाघिन पेंच टाइगर रिजर्व की धरोहर मानी जाती रही है।” 11 साल में आठ बार गर्भधारण कर 29 शावकों को जन्म देकर बाघिन ने देश में सबसे अधिक शावकों को जन्म देने का कीर्तिमान बनाया। इस कारण वह ‘पेंच की रानी‘ व ‘सुपर माम’ के नाम से पर्यटकों में मशहूर हो गई। वर्ष 2008 में लगाए गए रेडियो कालर के कारण उसे कालर वाली बाघिन का नाम भी मिला। पेंच टाइगर रिजर्व के प्रवेश द्वार वन ग्राम कर्माझिरी की निवासी दबंग आदिवासी महिला शांताबाई सरयाम ने अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पेंच की रानी को मुखाग्नि दी।

सुपर मॉम कॉलरवाली बाघिन के 25 शावक जीवित रहे

कॉलरवाली बाघिन ने अपने 16 साल की पूरी उम्र में करीब 29 शावकों को जन्म दिया और उनमें से 25 शावक जीवित रहे थे। वन्यप्राणी विषेशज्ञों के अनुसार एक बाघिन के पूरे जीवन में इतनी बड़ी संख्या में शावकों को जन्म देना और फिर उनमें से 25 शावकों के जीवित रहना अपने आप में अनोखा रिकॉर्ड है जो कॉलरवाली बाघिन के नाम दर्ज है।

बाघिन ने सबसे पहले साल 2008 में तीन शावकों को जन्म दिया था। इसके बाद साल 2008 में अक्टूबर के महीने में चार, साल 2010 अक्टूबर में पांच, साल 2012 में मई के महीने में तीन, साल 2013 में अक्टूबर के महीने में तीन, साल 2015 में अप्रैल के महीने में चार, साल 2017 में तीन और साल 2018 में दिसंबर के महीने में चार शावकों को सुपर मॉम कॉलरवाली बाघिन ने जन्म दिया था।

बाघिन ने अपने जीवन के अंत तक अपना दबदबा बनाये रखा

बाघिन ने रिजर्व के कर्माझिरी के सिताघाट, फायर लाइन क्षेत्र में अपना दबदबा अंत तक बनाए रखा। बीते रविवार को इसी जगह उसका अंतिम संस्कार किया गया। उम्रदराज होने के बाद भी दिसंबर, 2021 के अंतिम सप्ताह में बाघिन पेड़ों पर एरिया मार्किग करती नजर आई थी। शावकों को ताकतवर नर बाघ से बचाकर वयस्क होने तक देखभाल करने के कारण वन्यजीव विशेषज्ञों ने उसे भरोसेमंद मां या ‘सुपर माम’ का दर्जा दिया। 29 शावकों में से 25 को वयस्क होने तक पालना व बचाना भी कीर्तिमान है और यह सभी जीवित हैं। भोपाल के अतिरिक्त मुख्य प्रधान वन संरक्षक (आइटी) संजय शुक्ला के मुताबिक, कॉलरवाली बाघिन देश में सबसे ज्यादा शावकों को जन्म देने वाली बाघिन थी। जंगल में बाघों का कुनबा बढ़ाने में उसका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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