इंदौर की 18 वर्षीय वरालिका श्रीवास्तव ने सभी केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय द्वारा आयोजित कामर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपीएल) परीक्षा में सफलता प्राप्त करके अपना सपना साकार किया। मध्यभारत से इकलौती सफल उम्मीदवार वरालिका ने सभी चुनौतियों को पार करके इस मुकाम को हासिल किया।इस पूरी चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को पूरा कर केवल 24 प्रतिभागी ही सफल हो पाए हैं।

कठिन परिस्थितियों में की परीक्षा की तैयारी

मई में कोरोना महामारी ने वरालिका की मां को छीन लिया और पिता डेढ़ महीने तक वेंटीलेटर पर रहे। माता-पिता के अस्पताल में भर्ती होने के कारण घर पर खाने की कोई व्यवस्था करने के लिए नहीं था। कई दिनों तक खाना नहीं मिलने से ऐसी स्थिति भी आई जब वरालिका और उसका छोटा भाई  बेहोशी की हालत में चले गए। दूर के शहरों में रहने वाले परिवार के सदस्यों ने संक्रमण के बीच आकर दोनों को संभाला। इन विषम परिस्थितियों में भी वरालिका ने अपनी परीक्षा की तैयारी जारी रखी और आखिरकार उसमें कामयाबी हासिल की। अपने लक्ष्य के प्रति ऐसे समर्पण के कारण ही उन्हें कोई भी चुनौति अपनी मंजिल तक पहुंचने से रोक नहीं पाई।

बचपन से पायलट बनने का जुनून था

वरालिका के पिता सर्वेश ने बताया कि वरालिका का जुनून ही था कि उसने अपना सपना पूरा किया। जब वह छठवीं कक्षा में थी तो उसे विमान से बाहर लेकर गया था। तभी से वह कहती थी कि पायलट बनना है। उसने अपने कमरे में जगह-जगह हवाई जहाज के फोटो लगाकर रखे हैं। हर साल वह कमरे की दीवार पर लिखती थी कि पायलट बनने में अब कितने वर्ष बाकी हैं।

मां के जाने का दुख असहनीय था

वरालिका का कहना है कि मां के चले जाने के दुख को सहन करना संभव नहीं था। मैंने इस बीच परीक्षा की तैयारी के समय को और बढ़ा दिया ताकि मां की याद कम आए। सोचती थी पायलट बनने का सपना पूरा हो जाएगा तो मां जहां भी है उन्हें भी अच्छा लगेगा।

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