क्या आप डरावनी फिल्मों को देखने के दौरान होने वाली रोमांचक घबराहट को व्यक्तिगत रूप से अनुभव करना चाहते हैं? यदि हाँ, तो इंदौर की अधूरी स्थापत्य विरासत, फूटी कोठी, आपकी रोमांचकारी पर्यटन स्थलों की सूची में अगले स्थान पर होनी ही चाहिए। इंदौर में स्थित एक छिपा हुआ रत्न, इस भवन का निर्माण 1886 में शुरू हुआ था, हालांकि, यह कभी पूरा नहीं हुआ। तो अपनी सीट की पेटियां बाँध लें या फिर अपने किसी करीबी दोस्त को कास कर पकड़ लें क्योंकि हम इस अधूरी कोठी का विवरण देने जा रहे हैं।

शिवाजी राव होल्कर के तहत विकसित

अपनी अधूरी वास्तुकला के नाम पर, इंदौर की फूटी कोठी को राजा शिवाजी राव होल्कर के शासन में विकसित किया गया था। इस कोठी का निर्माण 1886 में शुरू हुआ था, हालांकि, 1902 में काम रोक दिया गया था जब ब्रिटिश अधिकारियों को इसके वास्तविक उद्देश्य- महू में स्थित ब्रिटिश छावनी पर हमला करने के बारे में पता चला। आज, लगभग 300 कमरे, जो फूटी कोठी के तहखाने में स्थित हैं, तालों से जकड़े हुए हैं।

इस जगह के आसपास कई मिथकों का जन्म हुआ है, सबसे प्रसिद्ध यह है कि निर्माण बंद हो गया क्योंकि एक अलौकिक शक्ति ने मुख्य द्वार को हर बार उड़ा दिया, जब जब उसे प्लास्टर किया गया था। इस जगह को घेरने वाली भयानक आभा कुछ ऐसी है जिसे स्थानीय लोगों द्वारा सुनाई गई लोककथाओं के हर शब्द के साथ महसूस किया जा सकता है।

नॉक नॉक

फूटी कोठी के प्रेतबाधित गलियारों की कहानियों में कोई सार है या नहीं, इसका अंदाजा आप इस जगह पर जाकर ही लगा सकते हैं। फूटी कोठी के लाल-ईंटों और सुरम्य खंडहर आपकी यात्रा का इंतजार करते हैं। आप जो भी कहानी सुनें, वास्तुकला की भव्यता और औपनिवेशिक संबंधों के लिए इस लाल पत्थर की इमारत पर ज़रूर जाएं।

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