मुख्य बिंदु

इंदौर शहर मे सभी निजी स्कूलों को आरटीओ ने निर्देश दिया है की बच्चों की आवाजाही के लिए उन्ही बसों को तैनात किया जाएगा जो सुरक्षा दिशा निर्देशों का पूरी तरह से पालन करती हैं।

➡लॉकडाउन के कारण स्कूल बसों के रख-रखाव का काम लंबे समय से रुका हुआ था।

➡बसों की फिटनेस की जांच कराने के लिए शहर के 140 से अधिक प्राइवेट स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है।

➡आरटीओ ने निजी स्कूलों के प्रबंधन को एक्सपायर्ड फिटनेस सर्टिफिकेट वाली बसों के इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी दी है।

➡स्कूल बसों में सीट बेल्ट, फायर एक्सटीन्गुइशेर, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स, सीसीटीवी निगरानी और जीपीएस ट्रैकिंग जैसी अन्य सुविधाएं लगी होनी चाहिए।

इंदौर के परिवहन विभाग ने शहर के सभी निजी स्कूलों को निर्देश जारी करके कहा है कि बच्चों की आवाजाही के लिए उन्ही बसों को तैनात किया जाए जो सुरक्षा दिशा निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें। शहर में स्कूल फिर से खुलने के बाद, ये आदेश यह सुनिश्चित करने के लिए दिए गए थे कि इस्तेमाल किए गए वाहन काम करने योग्य और फिट स्थिति में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शहर में लगभग 140 निजी स्कूल हैं और उनमें से बड़ी संख्या में प्राइवेट बसें चलती हैं।

स्कूल बसों की स्थिति की जांच अब अनिवार्य


मध्य प्रदेश सरकार ने ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने के एक साल से अधिक समय के बाद 1 सितंबर को कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए स्कूलों को फिर से खोल दिया। महामारी के चलते हुए लॉकडाउन के कारण स्कूल बसों के रख-रखाव का काम लंबे समय से रुका हुआ था। इसे देखते हुए अभी शिक्षा केंद्रों द्वारा संचालित की जा रही बसों की स्थिति को लेकर अधिकारियों ने चिंता व्यक्त की है।

जिससे स्कूल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि बसें पूरी तरह से फिट स्थिति में हों। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरटीओ ने निजी स्कूलों के प्रबंधन को एक्सपायर्ड फिटनेस सर्टिफिकेट वाली बसों के इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी दी है। अगर कोई केंद्र इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानदंडों का पालन करेंगे स्कूल


कथित तौर पर, स्कूल प्रशासन को भी इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक है। रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल बसों में सीट बेल्ट, फायर एक्सटीन्गुइशेर, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स, सीसीटीवी निगरानी और जीपीएस ट्रैकिंग जैसी अन्य सुविधाएं लगी होनी चाहिए। इसके अलावा, यह बताया गया है कि अधिकारियों द्वारा बताए गए नियमों के अनुपालन का निरीक्षण किया जाएगा।