मध्य प्रदेश में धीरे-धीरे कम हो रहे कोविड खतरे से राज्य प्रशासन ने राहत की सांस ली है। प्रशासन का लक्ष्य मई के अंत तक मामलों में 0% पॉजिटिविटी रेट हासिल करना है। अब तक, प्रदेश के सभी जिलों में वायरस के पॉजिटिविटी रेट को 10% की सीमा के भीतर लाया गया है, जहां इंदौर में 8.1% का उच्चतम अनुपात दर्ज किया गया है, वहीं सोमवार तक, प्रदेश में समग्र सकारात्मकता दर नियंत्रित 3.9% आंकी गई थी।

कोरोना मुक्त एमपी का सपना पूरा करने की दिशा में चल रहा है काम


कोविड-19 नियंत्रण और एहतियात ग्रुप (COVID-19 control and precaution group) के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि मप्र की महामारी प्रबंधन रणनीति से अच्छे परिणाम मिल रहे हैं, जिससे संक्रमण प्रसार प्रभावी रूप से कम हो रहा है, इस उपलब्धि को हासिल करने में जनभागीदारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अब राज्य का लक्ष्य अपने गांवों और ग्राम पंचायतों से कोरोना वायरस के संक्रमण को पूरी तरह खत्म करना है। जन प्रतिनिधियों या कोविड संकट प्रबंधन समिति के सदस्यों को ग्रामीण क्षेत्रों को कोविड मुक्त बनाने का काम सौंपा गया है। एक बार इस महत्वाकांक्षा को साकार करने के बाद, 15 अगस्त को ऑन-ग्राउंड आपदा प्रबंधन समितियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कृत किया जाएगा।

राज्य में कोरोना कर्फ्यू 31 मई तक बढ़ाया जाएगा


सीएम ने आगे इस बात पर ज़ोर दिया कि 31 मई तक चल रहे 'कोरोना कर्फ्यू' का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए, ताकि राज्य में शून्य प्रतिशत पॉजिटिविटी का लक्ष्य प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सके। लोगों को वायरस के संक्रमण से बचने के लिए कोविड-19 संबंधित प्रोटोकॉल और नियमों का पालन करना चाहिए। मास्क पहनना, बार-बार हाथ धोना या सैनिटाइज करना और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना इस वक्त महत्वपूर्ण है।

राज्य 31 मई के बाद आर्थिक गतिविधियों में प्रतिबंधों और आवश्यक सावधानियों के साथ छूट प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड के खतरे को खत्म करने का अभियान जारी रहेगा ताकि कोरोना रोगियों की तुरंत पहचान की जा सके और उन्हें समय पर उचित उपचार प्रदान किया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, व्यापक प्रसार को कम करने के लिए, जिन क्षेत्रों में ताज़ा मामले सामने आ रहे हैं, वहां माइक्रो कंटेनमेंट ज़ोन बनाए जाएंगे।