मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने इंदौर में कुछ प्रतिबंधों के साथ, आज से किराने की दुकानें, फलों और सब्ज़ियों की दुकानों को खोलने की अनुमति दी है। यह फैसला 20 मई को जिले में लगाए गए लॉकडाउन को लेकर दायर हुई एक याचिका को देखते हुए लिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार डीएम ने प्रतिबंधों को हटाने के लिए देर रात मंगलवार को रिवाइज्ड आदेश जारी किया।

जिला प्रशासन ने इंदौर में कड़े प्रतिबंधों में ढील दी

1 जून के अनलॉक के पहले, इंदौर में 20 मई को लागू किये गए प्रतिबंधों में कई सेवाएं शामिल थीं। कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे के बीच 28 मई तक लगे प्रतिबंधों में सब्जियों, फलों और किराना की बिक्री पर भी रोक लगा दी गयी थी और महामारी प्रोटोकॉल के अनुसार अन्य आवश्यक सेवाओं पर भी। जहां सभी लोग इन कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहे थे वहीँ चंचल गुप्ता नाम के एक व्यक्ति ने जबलपुर उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की।

दायर की गयी याचिका में 'चंचल' ने उल्लेख किया की कोरोना से रिकवर हो रहे लोगों का फल और सब्ज़ी खाना अनिवार्य है और इस प्रकार के प्रतिबन्ध लोगों के लिए गहन समस्या का विषय है। इसके परिणामस्वरूप उच्च न्यायालय ने प्रशासन को निर्देश दिया कि वे महामारी की सावधानियों को ध्यान में रखते हुए फलों, सब्जियों और राशन की बिक्री के संबंध में उचित व्यवस्था करें।

कोर्ट ने आगे यह आदेश दिया है की दुकाने हफ्ते में पांच दिन खुलेंगी और किराने की दुकानें खुलने और फल और राशन की होम डिलीवरी की अनुमति भी जिला आदेश में दी गयी है। फलों और सब्ज़ियों के ठेलों को भी काम करने की अनुमति है और ये सभी सुविधाएं सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक चालु रहेंगी।

वहीं कलेक्टर की घोषणा के अनुसार सियागंज, मल्हारगंज, मालवा मिल, छावनी समेत अन्य जगहों पर सड़क किनारे फल-सब्जियों की बिक्री और किराना सामान की थोक बिक्री बंद रहेगी। बड़ी मंडियां बंद रहेंगी और दूध का वितरण पहले की तरह जारी रहेगा।